Astana International Financial Centre (AIFC) और भारत के GIFT City के बीच एक नई साझेदारी की चर्चा जोरों पर है। इस डील का मकसद सेंट्रल एशिया और भारत के कैपिटल मार्केट्स के बीच की दूरी को मिटाना और निवेश के नए रास्ते खोलना है।
बाजार जुड़ने की नई कवायद
सेंट्रल एशिया का प्रमुख फाइनेंशियल हब, Astana International Financial Centre (AIFC), भारत के गुजरात स्थित GIFT City के साथ हाथ मिलाने की योजना बना रहा है। AIFC के गवर्नर Renat Bekturov के मुताबिक, इस साझेदारी का मुख्य उद्देश्य दोनों क्षेत्रों के बीच कैपिटल फ्लो को आसान बनाना और रेगुलेटरी फ्रेमवर्क को एक जैसा बनाना है।
क्यों खास है यह साझेदारी?
वर्ष 2018 में अपनी स्थापना के बाद से, AIFC ने सेंट्रल एशिया में एक बड़े बिजनेस हब के रूप में पहचान बनाई है। यह सेंटर इंग्लिश कॉमन लॉ (English Common Law) पर आधारित रेगुलेटरी सिस्टम के तहत काम करता है, जिसने 90 देशों की 6,500 से ज्यादा कंपनियों को आकर्षित किया है। सितंबर 2026 तक, यहाँ कुल निवेश का आंकड़ा $27 बिलियन के स्तर पर पहुंच गया है।
GIFT City के लिए क्या हैं मायने?
भारत का GIFT City पहले से ही ग्लोबल फाइनेंशियल हब को टक्कर देने की तैयारी कर रहा है। यह साझेदारी ग्रीन फाइनेंस, डिजिटल एसेट्स और एसेट मैनेजमेंट जैसे क्षेत्रों में तेजी लाने का काम करेगी। AIFC ने पहले ही ग्रीन बॉन्ड्स की लिस्टिंग में अपनी धाक जमाई है, और GIFT City भी भारत के सस्टेनेबिलिटी लक्ष्यों को पूरा करने के लिए इसी राह पर आगे बढ़ रहा है।
निवेशकों के लिए क्या है संकेत?
निवेशकों को अब इस बात पर नजर रखनी चाहिए कि क्या यह बातचीत किसी ठोस समझौते में बदलती है। अगर दोनों के बीच सिक्योरिटीज की क्रॉस-लिस्टिंग या डिजिटल एसेट्स के लिए यूनिफाइड स्टैंडर्ड्स बनते हैं, तो इससे दोनों देशों के बीच बिजनेस के नए अवसर पैदा होंगे। यह न केवल GIFT City की अंतरराष्ट्रीय पहुंच बढ़ाएगा, बल्कि भारतीय फाइनेंशियल सर्विसेज सेक्टर के लंबे समय के ग्रोथ विजन को भी मजबूत करेगा।
