आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) अब करियर के पुराने तौर-तरीकों को चुनौती दे रहा है। कंपनियों के लिए अब कर्मचारियों को लगातार 'री-स्किल' (Retrain) करना जरूरी हो गया है। भारतीय निवेशकों के लिए यह समझना जरूरी है कि कौन सी कंपनियां अपने ह्यूमन कैपिटल को एक संपत्ति के रूप में मैनेज कर रही हैं।
अब वह दौर बीत गया जब एक ही स्किल के दम पर 40 साल का करियर निकल जाता था। इंडस्ट्रीज में AI के तेजी से बढ़ते दखल ने प्रोफेशनल एक्सपर्टीज की उम्र कम कर दी है। वर्ल्ड-स्किल (WorldSkills) के चेयर फ्रांसिस हुरंट का मानना है कि अब लंबे समय तक जॉब सिक्योरिटी के लिए लगातार रिट्रेनिंग एक अनिवार्य हिस्सा बन गई है, क्योंकि तकनीक का बदलाव अब पुराने लेबर फोरकास्ट से कहीं ज्यादा तेज है।\n\n### री-स्किलिंग से आती है एफिशिएंसी\nभारतीय IT सेक्टर की दिग्गज कंपनियां जैसे Tata Consultancy Services, Infosys, और HCLTech लंबे समय से अपने कर्मचारियों को जनरेटिव AI जैसी नई तकनीकों के लिए तैयार कर रही हैं। निवेशक के तौर पर देखें, तो ये ट्रेनिंग प्रोग्राम कंपनी के लिए 'एट्रिशन रेट' (Attrition Rate) को कम करने का एक बेहतरीन तरीका हैं। नए लोगों को हायर करने और उन्हें ट्रेन करने के मुकाबले पुराने स्टाफ को अपस्किल करना कंपनियों के लिए ज्यादा किफायती है, जिससे लॉन्ग-टर्म प्रोडक्टिविटी बनी रहती है।\n\n### ह्यूमन कैपिटल की लागत और मार्जिन का खेल\nहालांकि, लगातार लर्निंग कल्चर को प्रमोट करने में कंपनी का एडमिनिस्ट्रेटिव खर्चा बढ़ता है। निवेशकों को यह ध्यान देना चाहिए कि ट्रेनिंग पर होने वाला खर्च कंपनी के क्वार्टरली मार्जिन को कैसे प्रभावित कर रहा है। जो कंपनियां आज ट्रेनिंग पर खर्च कर रही हैं, वे भविष्य में हाई टर्नओवर कॉस्ट से बचकर कॉम्पिटिटिव एडवांटेज हासिल कर सकती हैं।\n\n### निवेशकों के लिए अगला कदम\nआने वाली क्वार्टरली रिपोर्ट्स और मैनेजमेंट कमेंट्री में इन 3 चीजों पर नजर रखें:\n1. री-स्किलिंग बजट का जिक्र।\n2. एम्प्लॉई रिटेंशन रेट में बदलाव।\n3. रेवेन्यू पर एम्प्लॉई (Revenue per employee) के आंकड़े।\n\nजो कंपनियां अपने वर्कफोर्स एडॉप्शन का रोडमैप साफ रखती हैं, वे मार्केट के बड़े बदलावों को झेलने के लिए बेहतर स्थिति में होंगी।
