AI Stocks का फीका पड़ा जादू: क्या भारत की ओर रुख करेगा पैसा या बढ़ेगी मुश्किल?

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AuthorKaran Malhotra|Published at:
AI Stocks का फीका पड़ा जादू: क्या भारत की ओर रुख करेगा पैसा या बढ़ेगी मुश्किल?

एशियाई बाजारों में AI स्टॉक्स की चमक कम हो रही है, लेकिन निवेशकों का पैसा उम्मीद के मुताबिक भारत की ओर शिफ्ट नहीं हो रहा है। ग्लोबल स्तर पर बढ़ती US ट्रेजरी यील्ड और कच्चे तेल की कीमतों ने विदेशी निवेशकों को सतर्क कर दिया है, जिससे घरेलू बाजार अब केवल DIIs के भरोसे चल रहा है।

उम्मीदों पर फिरा पानी

साल भर से ताइवान और दक्षिण कोरिया के AI स्टॉक्स में जो निवेश की आंधी चल रही थी, अब वह धीरे-धीरे ठंडी पड़ रही है। एक्सपर्ट्स को लग रहा था कि इन बाजारों से पैसा निकालकर निवेशक भारत जैसे इमर्जिंग मार्केट्स में पैसा लगाएंगे, लेकिन फिलहाल ऐसा होता नहीं दिख रहा है।

क्यों पीछे हट रहे हैं विदेशी निवेशक?

विदेशी निवेशक (FIIs) सिर्फ बाजार नहीं बदल रहे हैं, बल्कि वे रिस्क वाले एसेट्स से पूरी तरह दूरी बना रहे हैं। इसके पीछे दो मुख्य कारण हैं:

  1. US ट्रेजरी यील्ड का दबाव: अमेरिकी सरकार के 10-वर्षीय बॉन्ड यील्ड का 5% के स्तर तक पहुंचना एक बड़ी चुनौती है। जब सुरक्षित अमेरिकी बॉन्ड्स पर इतना शानदार रिटर्न मिल रहा हो, तो निवेशक भारत जैसे बाजारों में जोखिम क्यों उठाएंगे?
  2. क्रूड ऑयल का बढ़ता दाम: ब्रेंट क्रूड (Brent Crude) की कीमतों में तेजी भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए बड़ा सिरदर्द है। चूंकि भारत अपनी तेल जरूरतों का बड़ा हिस्सा आयात करता है, इसलिए तेल के दाम बढ़ने से महंगाई बढ़ती है और कंपनियों का प्रॉफिट मार्जिन दब जाता है।

भारतीय बाजार के लिए 'रक्षा कवच'

इस उतार-चढ़ाव के बीच, भारत के लिए राहत की बात हमारे घरेलू निवेशक (DIIs) हैं। म्यूचुअल फंड्स और इंश्योरेंस कंपनियों की ओर से जारी खरीदारी ने बाजार को गिरने से बचा रखा है। फिलहाल, भारतीय शेयरों में विदेशी होल्डिंग 17 साल के निचले स्तर पर है, जिससे हम अचानक आने वाले बड़े बिकवाली के झटकों से काफी हद तक सुरक्षित हैं।

आने वाले समय में बाजार में एकतरफा तेजी की उम्मीद कम है। निवेशकों के लिए अब ब्रॉड मार्केट ट्रेंड्स के बजाय चुनिंदा कंपनियों के परफॉर्मेंस पर ध्यान देना ही समझदारी होगी।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.