AI में तेजी के बाद अब निवेशक चिप बनाने वाली कंपनियों के फंड से पैसा निकाल रहे हैं। करीब **$5 अरब** का रिडेम्पशन (redemption) हुआ है। वहीं, भारतीय बाज़ारों में अगस्त **2026** में विदेशी निवेशकों की वापसी हुई है, जो महीनों की बिकवाली के बाद एक बड़ा बदलाव है।
AI का जादू फीका, चिप फंड्स में बिकवाली
दुनिया भर के बाजारों में एक बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है। निवेशक अब सेमीकंडक्टर (semiconductor) सेक्टर से अपने निवेश को कम कर रहे हैं। जून और जुलाई में AI और चिप बनाने वाली कंपनियों के फंड्स में करीब $45 अरब का पैसा आया था, लेकिन पिछले दो हफ्तों में इनमें से लगभग $5 अरब वापस निकाल लिए गए हैं। ऐसा लगता है कि निवेशक इस गर्मी में हुई तेज बढ़त के बाद अब मुनाफावसूली कर रहे हैं।
वैल्यूएशन की चिंता और हकीकत
इस बिकवाली की मुख्य वजह वैल्यूएशन (valuation) को लेकर चिंता है। बाज़ार यह सवाल पूछ रहा है कि क्या AI से जुड़ी कंपनियों के शेयर की मौजूदा कीमतें उनके लंबे समय के ग्रोथ पोटेंशियल (growth potential) के हिसाब से सही हैं।
हालांकि, स्थिति पूरी तरह से निराशाजनक नहीं है। कुछ कंपनियां अभी भी मजबूत नतीजे दे रही हैं। उदाहरण के लिए, Applied Materials ने हाल ही में $9.12 अरब का रिकॉर्ड तिमाही रेवेन्यू (revenue) दर्ज किया है। यह दिखाता है कि AI इंफ्रास्ट्रक्चर (infrastructure) की असली मांग अभी भी इंडस्ट्री के प्रदर्शन का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है।
भारतीय बाज़ार में विदेशी निवेश की वापसी
टेक्नोलॉजी सेक्टर में हो रही मुनाफावसूली के उलट, भारतीय इक्विटी (equity) बाज़ार में सेंटीमेंट (sentiment) बदलने के शुरुआती संकेत दिख रहे हैं। फॉरेन पोर्टफोलियो इन्वेस्टर्स (FPIs), जो पिछले कई महीनों से लगातार बिकवाली कर रहे थे, अगस्त की शुरुआत में खरीदार बनकर लौटे हैं। आंकड़ों के मुताबिक, विदेशी निवेशकों ने अगस्त 2026 के पहले हफ्ते में ही भारतीय इक्विटी में ₹12,921 करोड़ का निवेश किया है। यह एक बड़ा बदलाव है और भारी बिकवाली के बाद कुछ राहत लेकर आया है।
घरेलू निवेशकों का बढ़ता दबदबा
यह विदेशी निवेश, भारतीय बाज़ार की ओनरशिप (ownership) स्ट्रक्चर में बदलाव के साथ-साथ हुआ है। डोमेस्टिक इंस्टीट्यूशनल इन्वेस्टर्स (DIIs) का प्रभाव बढ़ा है और अब वे बाज़ार का 18.3% हिस्सा रखते हैं, जो विदेशी निवेशकों की 16.7% हिस्सेदारी से ज़्यादा है। घरेलू निवेशकों की इस मजबूत मौजूदगी ने बाज़ार को स्थिर रखने में मदद की है और यह पिछले सालों की तुलना में विदेशी बिकवाली के दबाव को बेहतर तरीके से झेल पाया है।
सुरक्षित निवेश की ओर झुकाव
इसके अलावा, निवेशक पारंपरिक सुरक्षित निवेश (safe-haven assets) की ओर भी बढ़ रहे हैं। गोल्ड (Gold) यानी सोने में लगातार निवेश आ रहा है। जुलाई 2026 में ग्लोबल गोल्ड ईटीएफ (ETFs) में $3 अरब का नेट निवेश हुआ। यह पिछले महीनों के आउटफ्लो (outflow) के विपरीत है और दिखाता है कि निवेशक टेक्नोलॉजी स्पेस में अस्थिरता के बीच अपने पोर्टफोलियो को संतुलित कर रहे हैं।
आगे क्या?
निवेशकों के लिए यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि सेमीकंडक्टर में यह सुधार कितना टिकाऊ है। क्या यह सिर्फ एक बड़े ग्रोथ ट्रेंड (growth trend) में एक स्वस्थ ठहराव है, या यह ओवरवैल्यूएशन (overvaluation) के जवाब में है? इसी तरह, भारत में, यह देखना होगा कि क्या विदेशी निवेशकों की अगस्त की खरीदारी एक लगातार ट्रेंड साबित होती है या सिर्फ एक अस्थायी उछाल।
