Council of Economic Advisers (CEA) के पूर्व चेयर Jason Furman ने सुझाव दिया है कि जूनियर इकोनॉमिस्ट्स के रूटीन कामों को अब AI संभाल सकता है। हालांकि, एक्सपर्ट्स इस पर बंटे हुए हैं और मानवीय विवेक को अपरिहार्य बता रहे हैं।
आर्थिक नीति (Economic Policy) के उच्च स्तरों पर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की भूमिका को लेकर बहस छिड़ गई है। हाल ही में, व्हाइट हाउस के Council of Economic Advisers (CEA) के पूर्व चेयर Jason Furman ने यह विचार रखा है कि डेटा प्रोसेसिंग, रिसर्च और समरी तैयार करने जैसे काम, जो अभी जूनियर स्टाफ द्वारा किए जाते हैं, उन्हें AI के जरिए ज्यादा तेजी और सटीकता से किया जा सकता है।
AI का बढ़ता प्रभाव
Furman ने अक्टूबर 2026 में 'Econvitals' नाम का एक प्लेटफॉर्म भी लॉन्च किया है, जो AI के जरिए अमेरिकी आर्थिक डेटा और Federal Reserve के अधिकारियों के बयानों को ट्रैक करता है। उनका तर्क है कि एंट्री-लेवल का अधिकांश काम दोहराव वाला होता है, जिसे लार्ज लैंग्वेज मॉल्स आसानी से पूरा कर सकते हैं। इससे सीनियर लीडर्स को स्ट्रैटेजी पर ध्यान देने का ज्यादा समय मिलेगा।
मानवीय विवेक क्यों जरूरी है?
इस दक्षता के दावों के बावजूद, कई विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि CEA जैसे संस्थानों का काम सिर्फ डेटा प्रोसेस करना नहीं है, बल्कि सरकार की नीतियों में एक 'चेक' की तरह काम करना है। अर्थशास्त्रियों का मानना है कि AI सिर्फ पुराने डेटा और संभावनाओं (Probability) पर काम करता है, जबकि चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में सही निर्णय लेने के लिए मानवीय समझ और 'क्रिएटिव डिसेंट' (असहमत होने की क्षमता) अनिवार्य है।
भविष्य के जोखिम
इस बहस का सबसे बड़ा रिस्क 'प्रोफेशनल पाइपलाइन' के खत्म होने का है। यदि जूनियर स्तर पर नौकरियां कम होती हैं, तो भविष्य के सीनियर लीडर्स के पास सीखने के लिए वह अनुभव नहीं होगा जो उन्हें जटिल चुनौतियों को संभालने के लिए तैयार करता है। इसके अलावा, AI द्वारा गलत सूचनाएं या 'Hallucinations' देने का खतरा भी बना रहता है, जो नीति निर्धारण में बड़ी आर्थिक चूक का कारण बन सकता है। अंत में, भविष्य एक हाइब्रिड मॉडल का है, जहां AI केवल एक टूल होगा, लेकिन अंतिम फैसले के लिए मानवीय निगरानी (Human Oversight) सबसे महत्वपूर्ण रहेगी।
