साल 2026 में AI इंफ्रास्ट्रक्चर पर वैश्विक खर्च **$1 ट्रिलियन** के पार पहुंच गया है। बड़ी टेक कंपनियां अब कैश के बजाय भारी कर्ज का सहारा ले रही हैं, जिससे निवेशकों के बीच चिंता बढ़ गई है।
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की दौड़ में शामिल होने के लिए कंपनियां पानी की तरह पैसा बहा रही हैं, जो अब $1 ट्रिलियन के आंकड़े को पार कर चुका है। लेकिन इस तकनीकी क्रांति के पीछे की कहानी अब चिंताजनक होती जा रही है। बड़ी टेक कंपनियां, जिन्हें 'हाइपरस्केलर्स' कहा जाता है, अब अपने मुनाफे के बजाय उधार ली गई पूंजी (Debt) से डेटा सेंटर्स और हार्डवेयर पर दांव लगा रही हैं।
कर्ज का बढ़ता अंबार
केवल 2026 में ही AI-संबंधित बॉन्ड जारी करने का आंकड़ा $300 बिलियन तक पहुंच गया है। दिक्कत यह है कि इन कंपनियों को अमेरिकी सरकार के ट्रेजरी बॉन्ड्स से कड़ा मुकाबला करना पड़ रहा है। बाजार में भारी मात्रा में कर्ज आने और मुनाफे को लेकर अनिश्चितता के कारण, अब लेंडर्स (निवेशक) ज्यादा ब्याज दर की मांग कर रहे हैं, जिससे कंपनियों के लिए भविष्य में विस्तार करना महंगा साबित हो रहा है।
Oracle बना इंडस्ट्री का लिटमस टेस्ट
इस मामले में Oracle सबसे ज्यादा चर्चा में है। कंपनी के डेटा सेंटर विस्तार के लिए ली गई उधारी का स्तर अब 'जंक रेटिंग' से सिर्फ एक पायदान ऊपर है। डिफॉल्ट के जोखिम को देखते हुए, Microsoft जैसी कैश-रिच कंपनियों की तुलना में Oracle के लिए लोन लेना काफी महंगा हो गया है। अगर Oracle जैसे दिग्गज कंपनियां अपनी उधारी नहीं संभाल पाती हैं, तो इसका मतलब है कि बाकी टेक सेक्टर के लिए भी खतरे की घंटी बज चुकी है।
आगे क्या है जोखिम?
कंपनियों के सामने केवल पैसों की ही नहीं, बल्कि ऑपरेशनल दिक्कतें भी हैं। डेटा सेंटर्स के लिए बिजली की भारी कमी और जटिल 'ऑफ-बैलेंस-शीट' फंडिंग स्ट्रक्चर से निवेशकों को असली जोखिम का अंदाजा लगाना मुश्किल हो गया है। अब सभी की नजरें कंपनियों के अपकमिंग क्वार्टरली नतीजों पर टिकी हैं, जहां यह साफ होगा कि क्या AI से होने वाला रिटर्न इस बढ़ते कर्ज के बोझ को झेल पाएगा या नहीं।
