AI का डर और मंदी के संकेत: ग्लोबल मार्केट में हाहाकार, भारतीय शेयर बाजार भी गिरा!

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Author Mehul Desai | Published at:
AI का डर और मंदी के संकेत: ग्लोबल मार्केट में हाहाकार, भारतीय शेयर बाजार भी गिरा!
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आज यानी **5 फरवरी 2026** को दुनिया भर के शेयर बाजारों में बड़ी गिरावट दर्ज की गई। निवेशकों में दहशत का माहौल है, जिसकी मुख्य वजहें हैं - खराब आर्थिक आंकड़े और Anthropic कंपनी के नए AI टूल्स का असर।

आज, 5 फरवरी 2026 को, ग्लोबल फाइनेंशियल मार्केट में कई कारणों से भारी गिरावट देखी गई। खराब होते आर्थिक आंकड़े और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की नई तकनीकों के disruptive (विध्वंसक) प्रभाव ने निवेशकों को चिंता में डाल दिया है। दुनिया भर के प्रमुख शेयर सूचकांक (indices) लाल निशान में बंद हुए, और कमोडिटी मार्केट में भी भारी बिकवाली हुई।

बाजार में इस गिरावट की एक बड़ी वजह अमेरिका से आए निराशाजनक इकोनॉमिक डेटा हैं। अमेरिका में बेरोज़गारी के आंकड़े तेजी से बढ़े हैं। 31 जनवरी 2026 को समाप्त हुए हफ्ते में, नए बेरोज़गारी भत्तों के लिए आवेदन करने वालों की संख्या बढ़कर 231,000 तक पहुंच गई। यह पिछले लगभग दो महीनों में सबसे बड़ी साप्ताहिक वृद्धि है और श्रम बाजार में संभावित समस्याओं का संकेत देती है। इसके अलावा, दिसंबर 2025 में नौकरी के खुले पदों की संख्या घटकर 6.542 मिलियन रह गई, जो सितंबर 2020 के बाद सबसे निचला स्तर है। यह स्थिति इकोनॉमी के धीमे पड़ने का संकेत दे रही है।

बाजार में घबराहट का एक और बड़ा कारण Anthropic कंपनी का नया AI टूल है। Anthropic ने अपने 'Claude Cowork' टूल के लिए एडवांस AI प्लगइन्स लॉन्च किए हैं, जिनमें से एक खास तौर पर कानूनी कामों को ऑटोमेट (स्वचालित) करने के लिए बनाया गया है। इस लॉन्च ने सॉफ्टवेयर, लीगल टेक और फाइनेंशियल सर्विसेज सेक्टर में हलचल मचा दी है। एनालिस्ट्स इसे 'SaaSpocalypse' कह रहे हैं। इस एक ही ट्रेडिंग सेशन (सत्र) में करीब $285 बिलियन का मार्केट वैल्यूएशन साफ हो गया। Thomson Reuters और RELX जैसी कंपनियों के शेयर तेजी से गिरे। यह दिखाता है कि निवेशक अब AI को सिर्फ मौजूदा बिजनेस मॉडल को बेहतर बनाने वाले टूल के तौर पर नहीं, बल्कि सीधे तौर पर पुरानी कंपनियों के लिए खतरा मानते हैं।

इस बीच, कमोडिटी मार्केट, खासकर धातुओं (metals) पर भी भारी दबाव देखा गया। इसका मुख्य कारण अमेरिकी डॉलर का मजबूत होना है, जिससे डॉलर में ट्रेड होने वाली संपत्तियां (assets) अन्य मुद्राओं वाले देशों के लिए महंगी हो जाती हैं। गुरुवार को चांदी (silver) की कीमतों में लगभग 15% की गिरावट आई, जबकि सोना (gold) करीब 2% और तांबा (copper) करीब 1.4% नीचे गिरे। यह गिरावट 'रिस्क-ऑफ' सेंटिमेंट (खतरे से बचने की सोच) को दर्शाता है।

सेंट्रल बैंक भी इस मुश्किल इकोनॉमिक माहौल में सावधानी बरत रहे हैं। बैंक ऑफ इंग्लैंड (Bank of England) ने 5 फरवरी 2026 को अपनी प्रमुख इंटरेस्ट रेट 3.75% पर बरकरार रखी। हालांकि, मॉनेटरी पॉलिसी कमेटी (MPC) के सदस्यों के बीच 5:4 का बहुत करीबी वोटिंग नतीजा दिखाता है कि नीति को लेकर अंदरूनी मतभेद हैं और भविष्य के फैसले डेटा पर बहुत निर्भर करेंगे। बैंक ने 2026 और 2027 के लिए यूके की GDP ग्रोथ के अनुमानों को भी घटा दिया है और बेरोज़गारी दर 5.3% तक पहुंचने का अनुमान जताया है। IMF ने जनवरी 2026 में ग्लोबल ग्रोथ का अनुमान 3.3% लगाया है, लेकिन टेक्नोलॉजी से जुड़ी उम्मीदों का फिर से मूल्यांकन और बढ़ते भू-राजनीतिक (geopolitical) तनावों को प्रमुख जोखिम बताया है।

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