ग्लोबल मार्केट में AI की तेजी और US ट्रेजरी यील्ड के बीच एक बड़ा बैलेंस बन रहा है। जहां दुनियाभर में लोन महंगे हो रहे हैं, वहीं भारत में लोग अपनी जरूरतों को पूरा करने के लिए गोल्ड-लोन (Gold Loan) का सहारा ले रहे हैं।
ग्लोबल फाइनेंशियल मार्केट्स में इस वक्त टेक्नोलॉजी की रफ्तार और बढ़ते कर्ज के बोझ के बीच एक बड़ी जंग चल रही है। एक तरफ आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) सेक्टर निवेशकों के लिए उम्मीद की किरण बना हुआ है। हाल ही में Nvidia ने अपनी Q2 FY27 की रेवेन्यू $96.2 बिलियन बताई है, जो सालाना आधार पर 106% ज्यादा है। इससे AI बबल का डर फिलहाल के लिए कम हुआ है। लेकिन इस ग्रोथ को बनाए रखने के लिए भारी निवेश की जरूरत है, जो काफी हद तक कर्ज से आ रहा है। अमेरिकी कर्ज का आंकड़ा $40 ट्रिलियन के पार निकल चुका है, जिससे US ट्रेजरी यील्ड कई सालों के उच्चतम स्तर पर है और पूरी दुनिया के लिए उधार लेना महंगा हो गया है।
भारत में गोल्ड लोन की बढ़ती चमक
विकसित बाजारों में लिक्विडिटी कम हो रही है, लेकिन भारत की अर्थव्यवस्था में एक अलग ट्रेंड दिख रहा है—गोल्ड-लोन की मांग में भारी उछाल। लोग पर्सनल लोन के मुकाबले गोल्ड-लोन को तरजीह दे रहे हैं क्योंकि यह सामान्य अनसिक्योर्ड लोन से लगभग 3% सस्ता पड़ता है। Indian Bank जैसे सरकारी लेंडर्स का अनुमान है कि FY27 के अंत तक उनका गोल्ड लोन पोर्टफोलियो ₹1.5 ट्रिलियन के पार पहुंच जाएगा। यह दिखाता है कि परिवार अब सोना बेचे बिना अपनी नकदी की जरूरतें पूरी कर रहे हैं।
रिस्क और चुनौतियां
हालांकि यह एक आसान लिक्विडिटी का जरिया है, लेकिन इसमें कुछ जोखिम भी छिपे हैं। अगर सोने की कीमतों में गिरावट आती है या कर्जदारों की रीपेमेंट क्षमता कम होती है, तो बैंकों पर क्रेडिट रिस्क बढ़ सकता है। साथ ही, मिडिल ईस्ट के तनाव के कारण ब्रेंट क्रूड ऑयल $86 से $90 प्रति बैरल के बीच ट्रेड कर रहा है। भारत के लिए कच्चे तेल की ये ऊंची कीमतें मैन्युफैक्चरिंग और लॉजिस्टिक्स कंपनियों के मार्जिन पर दबाव डाल सकती हैं। आने वाले समय में आरबीआई (RBI) की पॉलिसी और घरेलू खपत का डेटा ही तय करेगा कि भारत की यह घरेलू रफ्तार बाहरी दबावों को कितनी मजबूती से झेल पाती है।
