AI इंफ्रास्ट्रक्चर की रफ्तार अब धीमी पड़ती दिख रही है। स्थानीय विरोध और बिजली-पानी की भारी किल्लत के चलते करीब **$130 बिलियन** से ज्यादा के डेटा सेंटर प्रोजेक्ट्स या तो रुक गए हैं या फिर उनमें देरी हो रही है।
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की बेतहाशा दौड़ अब असल दुनिया की हकीकत से टकरा रही है। टेक कंपनियां जिस तेजी से डेटा सेंटर्स का जाल बिछा रही हैं, उसे अब स्थानीय समुदायों और नियमों का कड़ा विरोध झेलना पड़ रहा है। यह विरोध न सिर्फ प्रोजेक्ट्स की टाइमलाइन को बिगाड़ रहा है, बल्कि लागत को भी कई गुना बढ़ा रहा है।
पावर ग्रिड और संसाधनों की कमी
हालिया आंकड़ों के अनुसार, अमेरिका में करीब $130 बिलियन से लेकर $162 बिलियन तक के डेटा सेंटर प्रोजेक्ट्स या तो रद्द कर दिए गए हैं या फिर होल्ड पर हैं। समस्या यह है कि मॉडर्न AI फैसिलिटीज को भारी मात्रा में बिजली और पानी चाहिए, जिसे मौजूदा पावर ग्रिड्स संभाल नहीं पा रहे हैं। कई जगह हालत यह है कि डेटा सेंटर तैयार तो हैं, लेकिन उन्हें बिजली का कनेक्शन नहीं मिल पा रहा है। कुछ मामलों में तो यह देरी 5 साल से भी ज्यादा की हो गई है।
कानूनी शिकंजा और सरकारी पाबंदियां
यह विरोध अब सिर्फ सड़कों तक सीमित नहीं है, बल्कि सरकारी फैसलों में भी दिख रहा है। जुलाई 2026 में न्यूयॉर्क स्टेट ने बड़े पैमाने पर डेटा सेंटर के परमिट पर 1 साल के लिए रोक लगा दी थी। अन्य शहरों में भी अधिकारी अब पानी की खपत और ग्रिड पर पड़ने वाले असर को लेकर सख्त पारदर्शिता की मांग कर रहे हैं।
निवेशकों के लिए बदलता नजरिया
निवेशकों के लिए अब 'एग्जीक्यूशन रिस्क' (Execution Risk) सबसे बड़ी चुनौती बन गया है। जब जमीन अधिग्रहण और शुरुआती निर्माण के बाद प्रोजेक्ट लटक जाता है, तो भारी पूंजी बिना किसी रिटर्न के ब्लॉक हो जाती है। अब सेक्टर में वही कंपनियां फायदे में रहेंगी जो बिजली की सस्टेनेबल सप्लाई और स्थानीय समुदायों के साथ बेहतर तालमेल बिठाने में सफल होंगी। पावर की किल्लत अब इस पूरे सेक्टर के लिए सबसे बड़ा 'बिजनेस हर्डल' साबित हो रही है।
