बाजार में दिग्गज टेक शेयरों का दबदबा डॉट-कॉम युग से भी आगे निकल गया है। साल 2026 में AI इंफ्रास्ट्रक्चर पर होने वाला **$700 बिलियन** का भारी-भरकम खर्च और छिपे हुए कर्ज निवेशकों के लिए बड़ा रिस्क बन रहे हैं।
मार्केट में खतरनाक कंसंट्रेशन
मौजूदा ग्लोबल मार्केट सिर्फ कुछ चुनिंदा टेक कंपनियों के भरोसे चल रहा है। हालिया डेटा के मुताबिक, S&P 500 की टॉप 10 कंपनियों का मार्केट वैल्यू में कुल हिस्सेदारी 41% तक पहुंच गई है। यह लेवल साल 2000 के डॉट-कॉम बबल के दौरान के 27% से भी कहीं ज्यादा है, जो पूरे बाजार को इन चंद कंपनियों के प्रदर्शन के प्रति बेहद संवेदनशील बना रहा है।
AI स्पेंडिंग और रेवेन्यू का गैप
साल 2026 में Microsoft, Meta, Google और Amazon जैसी दिग्गज कंपनियां AI इंफ्रास्ट्रक्चर, चिप्स और डेटा सेंटर्स पर $700 बिलियन से ज्यादा खर्च करने की तैयारी में हैं। निवेशकों के मन में अब बड़ा सवाल यह है कि क्या AI से होने वाली कमाई इस भारी-भरकम खर्च के मुकाबले टिक पाएगी? अगर समय रहते ठोस रिटर्न नहीं मिला, तो कंपनियों को अपना खर्च घटाना पड़ सकता है, जिससे सेक्टर में बड़ी सुस्ती आ सकती है।
'सर्कुलर फाइनेंसिंग' का मायाजाल
एक्सपर्ट्स 'सर्कुलर फाइनेंसिंग' (Circular Financing) को लेकर आगाह कर रहे हैं। इसमें बड़ी टेक कंपनियां एक-दूसरे में निवेश करती हैं या स्टार्टअप्स के कर्ज की गारंटी लेती हैं, ताकि वे उनका हार्डवेयर और सर्विस खरीद सकें। इससे डिमांड तो बहुत ज्यादा दिखती है, लेकिन असल प्रॉफिट का पता लगाना मुश्किल हो जाता है।
छिपा हुआ कर्ज और वैल्यूएशन का दबाव
बैलेंस शीट के बाहर भी बड़ी देनदारियां हैं। साल 2025 के अंत तक इन टेक कंपनियों पर लगभग $662 बिलियन का ऑफ-बैलेंस-शीट डेटा सेंटर लीज कमिटमेंट था। साथ ही, Shiller CAPE रेश्यो के हिसाब से ये स्टॉक्स पिछले 150 सालों में अपने दूसरे सबसे ऊंचे वैल्यूएशन पर ट्रेड कर रहे हैं। निवेशकों के लिए सलाह है कि वे केवल रेवेन्यू के आंकड़ों के बजाय प्रॉफिट ग्रोथ और कंपनी के कर्ज पर बारीक नजर रखें।
