केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने 3M के CEO विलियम ब्राउन के साथ मुलाकात कर भारत में R&D और एडवांस्ड मैन्युफैक्चरिंग बढ़ाने पर जोर दिया है। इस बीच, निवेशक कंपनी के Q1 FY27 नतीजों पर नजर गड़ाए हुए हैं, जहां बढ़ती लागत के कारण मार्जिन दबाव में दिख रहा है।
केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने नॉर्थ कैरोलिना में G20 बैठक के दौरान 3M के चेयरमैन और CEO विलियम ब्राउन से मुलाकात की। इस बातचीत का मुख्य उद्देश्य भारत को एडवांस्ड मैन्युफैक्चरिंग और रिसर्च एंड डेवलपमेंट (R&D) का ग्लोबल हब बनाना है, ताकि कंपनी सिर्फ कंज्यूमर सेगमेंट तक सीमित न रहकर भारत को अपनी ग्लोबल सप्लाई चेन का अहम हिस्सा बनाए।
नतीजों का विश्लेषण
निवेशकों के लिए यह विस्तार की चर्चा एक ऐसे समय में आई है जब कंपनी अपनी प्रॉफिटेबिलिटी बनाए रखने के लिए संघर्ष कर रही है। जून तिमाही (Q1 FY27) में कंपनी का नेट प्रॉफिट ₹233 करोड़ रहा, जो पिछले साल के मुकाबले 31.2% अधिक है। हालांकि, इसमें पुणे में जमीन की बिक्री से हुआ ₹73.13 करोड़ का वन-टाइम गेन शामिल है। अगर इस कमाई को हटा दें, तो कंपनी का कोर ऑपरेशनल परफॉर्मेंस कमजोर रहा है।
मार्जिन पर दबाव
कंपनी का ऑपरेटिंग प्रॉफिट मार्जिन पिछले साल के 20% से गिरकर इस तिमाही में 16.7% रह गया है। इसका बड़ा कारण बढ़ती इनपुट कॉस्ट और रुपये की वैल्यू में गिरावट है। राहत की बात यह है कि कंपनी ने FY2026 के लिए ₹506 प्रति शेयर का फाइनल डिविडेंड घोषित किया है, जो निवेशकों को कुछ हद तक राहत देता है।
आगे की चुनौतियां
एडवांस्ड मैन्युफैक्चरिंग की ओर बढ़ने के लिए भारी इन्वेस्टमेंट की जरूरत होगी। इसके साथ ही, कंपनी को अपने इंडस्ट्रियल और कंज्यूमर सेगमेंट में तगड़ी प्रतिस्पर्धा का सामना करना पड़ रहा है। आने वाले समय में निवेशकों के लिए सबसे बड़ा मॉनिटरेबल पॉइंट यही होगा कि क्या सरकार के साथ हुई चर्चा का असर कैपिटल स्पेंडिंग के रूप में दिखता है और क्या कंपनी अपने मार्जिन को वापस रिकवर कर पाती है।
