प्रधानमंत्री जन धन योजना (PMJDY) के तहत खुले 15 करोड़ से ज्यादा खाते फिलहाल निष्क्रिय (Inoperative) हो गए हैं। इनमें से करीब 5.72 करोड़ खातों में बैलेंस जीरो है, जो सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों के लिए बड़ी चुनौती बन गया है।
बैंकों पर बढ़ रहा परिचालन का बोझ
डिपार्टमेंट ऑफ फाइनेंशियल सर्विसेज के ताजा आंकड़ों के मुताबिक, करीब 15.37 करोड़ जन धन खाते ऐसे हैं जिनमें पिछले 2 साल से कोई ट्रांजैक्शन नहीं हुआ है। नियम के तहत इन्हें अब 'इनऑपरेटिव' माना जा रहा है। कुल 59 करोड़ से ज्यादा खुले खातों में से एक बड़ा हिस्सा निष्क्रिय होने के कारण बैंकों के लिए मुश्किलें खड़ी कर रहा है।
भले ही इन खातों में कोई हलचल नहीं है, लेकिन बैंकों को इनका रिकॉर्ड मेंटेन करने के लिए टेक्नोलॉजी इंफ्रास्ट्रक्चर और कोर बैंकिंग सपोर्ट जारी रखना पड़ता है। सबसे बड़ी चुनौती KYC (Know Your Customer) अनुपालन की है। इन खातों को जीवित रखने के लिए बैंकों को लगातार आउटरीच प्रोग्राम चलाने पड़ रहे हैं, जिससे उनका खर्च बढ़ रहा है और 'कॉस्ट-टू-इनकम रेशियो' पर असर पड़ रहा है।
डिपॉजिट और आगे की चुनौतियां
इस योजना का कुल डिपॉजिट बेस ₹3.15 लाख करोड़ के मजबूत स्तर पर बना हुआ है। हालांकि, उत्तर प्रदेश और बिहार जैसे राज्यों में निष्क्रिय और जीरो बैलेंस वाले खातों की संख्या सबसे ज्यादा है, जिससे इन क्षेत्रों में काम करने वाले बैंकों का प्रशासनिक बोझ (Administrative Load) बढ़ गया है।
निवेशकों के लिए नजरिया साफ है: आने वाले तिमाही नतीजों (Quarterly Results) में मैनेजमेंट की टिप्पणी पर ध्यान दें। क्या बैंक इन खातों को दोबारा सक्रिय कर पा रहे हैं या इन्हें मैनेज करने का अतिरिक्त खर्च उनके मुनाफे पर दबाव बना रहा है? यह आने वाले समय में बैंकों की दक्षता और फाइनेंशियल इंक्लूजन मिशन की सस्टेनेबिलिटी को समझने के लिए जरूरी होगा।
