US Visa Crisis: अमेरिका छोड़ भारत लौट रहे **12,700** टेक प्रोफेशनल्स, जानें क्या है कमाई का गणित

ECONOMY
Whalesbook Logo
AuthorAditi Chauhan|Published at:
US Visa Crisis: अमेरिका छोड़ भारत लौट रहे **12,700** टेक प्रोफेशनल्स, जानें क्या है कमाई का गणित

US वीजा अनिश्चितता और टेक सेक्टर में छंटनी के कारण इस साल के पहले **9** महीनों में **12,700** भारतीय टेक प्रोफेशनल्स वापस भारत लौट आए हैं। हालांकि भारत के पास अब टैलेंट पूल बढ़ा है, लेकिन स्थानीय जॉब मार्केट में सैलरी US के मुकाबले महज **एक-तिहाई** रह गई है।

रिवर्स माइग्रेशन का नया दौर

टेक्नोलॉजी सेक्टर में एक बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है। जनवरी से सितंबर 2026 के बीच करीब 12,700 व्हाइट-कॉलर टेक प्रोफेशनल्स अमेरिका से भारत वापस आ चुके हैं। यह आंकड़ा 2025 के कुल 15,100 लोगों के करीब पहुंच रहा है, जिससे संकेत मिल रहे हैं कि साल के अंत तक यह आंकड़ा पुराने रिकॉर्ड को तोड़ सकता है। इसके पीछे मुख्य वजह US की सख्त वीजा पॉलिसी (H-1B) और वहां की टेक कंपनियों में लगातार चल रही छंटनी (Layoffs) है।

डोमेस्टिक जॉब मार्केट का हाल

वापस आए प्रोफेशनल्स के लिए भारत में राह आसान नहीं है। साल 2021 जैसी बूमिंग हायरिंग मार्केट अब नहीं रही। कंपनियां अब विदेश में काम करने के अनुभव को ही काफी नहीं मान रहीं, बल्कि उन्हें AI, मशीन लर्निंग और क्लाउड इंफ्रास्ट्रक्चर में खास एक्सपर्टीज वाले लोग चाहिए। मार्केट में डिमांड कम और सप्लाई ज्यादा होने के कारण कॉम्पिटिशन काफी बढ़ गया है।

सैलरी में बड़ा अंतर (Salary Shock)

वापस लौटने वाले कर्मचारियों के लिए सबसे बड़ा झटका सैलरी है। अमेरिका में $70,000 से $150,000 सालाना कमाने वाले इंजीनियर्स को भारत में केवल $20,000 से $32,000 के आसपास के पैकेज मिल रहे हैं। यानी उन्हें अपनी पिछली सैलरी का महज 25% से 33% हिस्सा ही मिल पा रहा है। भारतीय कंपनियां 'लोकल पे पैरिटी' (Local Pay Parity) के नियमों पर सख्ती से टिकी हैं और केवल विदेशी अनुभव के आधार पर पैकेज बढ़ाने को तैयार नहीं हैं।

इन्वेस्टर्स के लिए क्या है संकेत?

इन्वेस्टर्स के लिए यह स्थिति मिली-जुली है। हाई-स्किल्ड टैलेंट मिलने से IT और GCC कंपनियों के प्रोजेक्ट्स को तेजी और कम लागत में पूरा करने में मदद मिल सकती है। हालांकि, अगर मार्केट की डिमांड नहीं बढ़ती है, तो वेज स्टैग्नेशन (Wage Stagnation) का खतरा बना रहेगा। निवेशकों को नजर रखनी होगी कि क्या कंपनियां इस टैलेंट का सही इस्तेमाल कर पाती हैं या फिर डिमांड और सप्लाई के इस अंतर से सेक्टर पर दबाव बढ़ेगा।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.