Bond Yields: क्रूड ऑयल के $110 पहुंचने से मचा हड़कंप, 10-Year G-Sec Yield 7.44% के पार

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AuthorMehul Desai|Published at:
Bond Yields: क्रूड ऑयल के $110 पहुंचने से मचा हड़कंप, 10-Year G-Sec Yield 7.44% के पार

ग्लोबल मार्केट में कच्चे तेल (Brent Crude) की कीमतों में आई सुनामी का असर भारतीय बाजार पर साफ दिख रहा है। बेंचमार्क 10-year G-Sec बॉन्ड यील्ड उछलकर **7.44%** पर पहुंच गई है, जो पिछले **3** सालों का उच्चतम स्तर है।

भारतीय डेट मार्केट में इस समय हड़कंप मचा हुआ है। पिछले एक महीने में बॉन्ड यील्ड में 40 बेसिस पॉइंट्स की तेजी देखी गई है। इस तूफानी तेजी के पीछे मुख्य वजह वेस्ट एशिया में बढ़ता भू-राजनीतिक तनाव है, जिसके कारण ब्रेंट क्रूड ऑयल का भाव $110 प्रति बैरल के स्तर को छू गया है। जब यील्ड बढ़ती है, तो इसका सीधा मतलब होता है कि निवेशक भविष्य की महंगाई को लेकर चिंतित हैं और अधिक रिटर्न की मांग कर रहे हैं।

इकोनॉमी पर क्या पड़ेगा असर?

महंगे क्रूड ऑयल का मतलब है कि देश का इंपोर्ट बिल बढ़ेगा, जिससे महंगाई और बढ़ने का खतरा है। चूंकि रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) का मुख्य फोकस महंगाई को काबू में रखना है, इसलिए बाजार अब इस बात पर नजर गड़ाए हुए है कि क्या बढ़ती लागत के चलते RBI अपनी ब्याज दरों (Interest Rates) को लंबे समय तक ऊंचा बनाए रखेगा। बॉन्ड यील्ड को बेंचमार्क माना जाता है, इसलिए इसके बढ़ने से सरकारी कर्ज के साथ-साथ आम जनता के लिए लोन भी महंगे हो सकते हैं।

रुपये में कमजोरी और आगे की राह

करेंसी मार्केट में भी इसका असर दिख रहा है। भारतीय रुपया डॉलर के मुकाबले 94.90 के स्तर के करीब ट्रेड कर रहा है। कमजोर रुपया और तेल की बढ़ती कीमतें देश के करंट अकाउंट बैलेंस पर अतिरिक्त दबाव डाल रही हैं। आने वाले समय में निवेशकों के लिए क्रूड ऑयल की कीमतों में स्थिरता सबसे महत्वपूर्ण होगी। अगर तेल के दाम इसी तरह ऊंचे बने रहे, तो बॉन्ड यील्ड और रुपये दोनों के लिए चुनौतियां और बढ़ सकती हैं। बाजार अब RBI के आगामी कमेंट्री का इंतजार कर रहा है ताकि ग्रोथ और इन्फ्लेशन टारगेट्स पर तस्वीर साफ हो सके।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.