Ethereum के को-फाउंडर Vitalik Buterin ने मुंबई में आयोजित Devcon 8 में कहा कि भारत का ब्लॉकचेन भविष्य यहां के लोकल डेवलपर्स के हाथ में है। अब मार्केट सट्टा टोकन प्रोजेक्ट्स से आगे बढ़कर 'जीरो-नॉलेज प्रूफ्स' जैसे डीप-टेक सॉल्यूशंस की ओर तेजी से शिफ्ट हो रहा है।
लोकल डेवलपर्स पर भरोसा
मुंबई में चल रहे Devcon 8 के दौरान Vitalik Buterin ने साफ कर दिया है कि Ethereum फाउंडेशन का रोल सिर्फ कोर प्रोटोकॉल को सुरक्षित रखने का है। उन्होंने जोर दिया कि भारत में ब्लॉकचेन का असली भविष्य सरकारी आदेशों से नहीं, बल्कि यहां के लोकल डेवलपर्स की इनोवेशन से तय होगा।
सट्टेबाजी से असली यूटिलिटी की ओर
डेवलपर इकोसिस्टम में बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है। पहले जहां इंटरेस्ट सिर्फ 'इनिशियल कॉइन ऑफरिंग' (ICO) और स्पेक्युलेटिव टोकन्स तक सीमित था, वहीं अब फोकस 'जीरो-नॉलेज प्रूफ्स' (Zero-Knowledge Proofs) और प्लुरलिस्टिक आइडेंटिटी प्रोटोकॉल जैसे जटिल तकनीकी विषयों पर शिफ्ट हो गया है। यह संकेत है कि भारतीय डेवलपर्स अब डीप-टेक चुनौतियों का सामना करने के लिए तैयार हैं।
निवेशकों के लिए चेतावनी
इन्वेस्टर्स को यह समझना चाहिए कि Ethereum कोई लिस्टेड कंपनी नहीं है। इसमें न तो कोई शेयर है, न कोई कॉर्पोरेट डेट और न ही NSE/BSE जैसी रिपोर्टिंग। यह पूरी तरह से एक डिसेंट्रलाइज्ड नेटवर्क है, इसलिए इसमें जोखिम कहीं ज्यादा है। भारतीय रेगुलेटरी फ्रेमवर्क अभी भी विकसित हो रहा है और क्रिप्टोकरेंसी मार्केट में जबरदस्त उतार-चढ़ाव (Volatility) बने रहते हैं।
आगे का रास्ता
भारत का विशाल डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर और ब्लॉकचेन तकनीक का मेल भविष्य के लिए बड़े अवसर खोल सकता है। अब निगरानी रखने वाली मुख्य बात यह है कि ब्लॉकचेन तकनीक भारत के रेगुलेटेड डिजिटल सिस्टम के साथ कितनी गहराई से और कितनी तेजी से जुड़ पाती है।
