क्रिप्टो टैक्स के नियम बदलेंगे? PARITY Act का नया स्वरूप
कांग्रेसियों स्टीवन हॉर्सफोर्ड और मैक्स मिलर ने डिजिटल एसेट टैक्सेशन के लिए कानून बनाने के प्रयास में PARITY Act को दोबारा पेश किया है। हालांकि, यह नया ड्राफ्ट इंडस्ट्री की लंबे समय से चली आ रही 'डी मिनिमिस' (de minimis) छूट से हटकर है। जहां पहले छोटी ट्रांजैक्शन के लिए एक डॉलर की सीमा थी, वहीं अब रेगुलेटेड स्टेबलकॉइन्स के लिए कहा गया है कि कोई लाभ (gain) या हानि (loss) तब तक नहीं होगा जब तक कि टैक्सपेयर का कॉस्ट बेस (cost basis) रिडेम्पशन वैल्यू (redemption value) के 99% से कम न हो। यह जटिल गणना एक स्पष्ट छूट की जगह ले रही है, जो रोजमर्रा के क्रिप्टो उपयोग को सरल बना सकती थी।
वॉश सेल रूल और टैक्स-लॉस हार्वेस्टिंग पर असर
इसके अलावा, बिल डिजिटल एसेट ट्रेडिंग पर 'वॉश सेल' (wash sale) नियमों को लागू करने का भी प्रस्ताव करता है, जो पहले सुझाया गया था लेकिन क्रिप्टो के लिए अभी तक लागू नहीं हुआ है। यह स्टॉक मार्केट की तरह ही टैक्स-लॉस हार्वेस्टिंग (tax-loss harvesting) को सीमित करता है, लेकिन उन क्रिप्टो ट्रेडर्स के लिए जटिलता बढ़ाता है जो इस रणनीति का इस्तेमाल करते रहे हैं। बिल निष्क्रिय स्टेकिंग (staking) और सक्रिय ट्रेडिंग (trading) के बीच अंतर को स्पष्ट करने का भी लक्ष्य रखता है, हालांकि सटीक नियम अभी भी व्याख्या के दायरे में हैं।
ग्लोबल टैक्स से अलग अमेरिका की राह
यह विधायी प्रयास दुनिया भर में रेगुलेटरी अनिश्चितता और क्रिप्टो टैक्स को लेकर अलग-अलग अंतर्राष्ट्रीय दृष्टिकोणों के बीच आया है। जहाँ जर्मनी क्रिप्टो को एक साल से अधिक रखने पर टैक्स छूट देता है, यूके इसे कैपिटल गेन्स टैक्स के अधीन मानता है, वहीं भारत 30% का फ्लैट टैक्स लगाता है। यह अंतर्राष्ट्रीय विविधता अमेरिकी नीति निर्माताओं के सामने नवाचार (innovation) और टैक्स राजस्व के बीच संतुलन बनाने की चुनौती को दर्शाती है। IRS 2025-26 से फॉर्म 1099-DA के माध्यम से अनिवार्य ब्रोकर रिपोर्टिंग शुरू करने वाला है, जो बदलती अनुपालन आवश्यकताओं को दर्शाता है।
निवेशकों की चिंताएं और आगे की राह
हालांकि PARITY Act का मकसद क्रिप्टो टैक्स को आधुनिक बनाना है, लेकिन इसकी जटिलताएं निवेशकों की तुरंत मदद नहीं कर सकती हैं। स्टेबलकॉइन्स के लिए 'डी मिनिमिस' सीमा से हटकर कॉस्ट बेस बनाम रिडेम्पशन वैल्यू की गणना छोटे ट्रांजैक्शन्स को सरल बनाने के बजाय और जटिल बना सकती है, जिससे उपयोगकर्ताओं के लिए एक नया अनुपालन बोझ (compliance burden) पैदा हो सकता है। वॉश सेल नियमों के विस्तार से कई ट्रेडर्स के लिए टैक्स-लॉस हार्वेस्टिंग रणनीति बंद हो जाएगी।
इस बिल के पारित होने की संभावना निश्चित नहीं है। पिछले कांग्रेस सत्रों में भी ऐसे ही प्रस्ताव पेश और बहस किए गए थे, लेकिन वे कानून नहीं बन सके। SEC और CFTC के बीच डिजिटल एसेट को सिक्योरिटीज या कमोडिटीज के रूप में वर्गीकृत करने पर जारी विवाद, आम सहमति की कमी को दर्शाता है।