Live News ›

Naoris Protocol: क्वांटम कंप्यूटर से क्रिप्टो को बचाने का नया हथियार लॉन्च! Bitcoin, Ethereum पर बड़ा खतरा

CRYPTO
Whalesbook Logo
AuthorKaran Malhotra|Published at:
Naoris Protocol: क्वांटम कंप्यूटर से क्रिप्टो को बचाने का नया हथियार लॉन्च! Bitcoin, Ethereum पर बड़ा खतरा
Overview

क्रिप्टोकरेंसी की दुनिया के लिए एक बड़ी चिंता सामने आई है - क्वांटम कंप्यूटर का खतरा! इस बीच, Naoris Protocol ने अपना क्वांटम-रेसिस्टेंट ब्लॉकचेन मेननेट लॉन्च कर दिया है। यह कदम Bitcoin और Ethereum जैसे प्रमुख ब्लॉकचेन को भविष्य में टूटने वाले एन्क्रिप्शन से बचाने की दिशा में एक अहम कदम माना जा रहा है।

क्रिप्टो पर क्वांटम कंप्यूटिंग का बढ़ता खतरा

क्वांटम कंप्यूटिंग का खतरा क्रिप्टोकरेंसी इंडस्ट्री पर मंडरा रहा है। हाल ही में Google की एक रिसर्च ने यह साफ कर दिया है कि भविष्य में ऐसे शक्तिशाली क्वांटम कंप्यूटर आ सकते हैं जो Bitcoin और Ethereum जैसे ब्लॉकचेन द्वारा इस्तेमाल की जाने वाली एन्क्रिप्शन को तोड़ सकते हैं। इसे 'Q-Day' कहा जा रहा है, जब खरबों डॉलर की डिजिटल संपत्ति दांव पर लग सकती है। मौजूदा सिस्टम के लिए पोस्ट-क्वांटम क्रिप्टोग्राफी (PQC) में माइग्रेट करना एक बड़ी चुनौती है। PQC वो क्रिप्टोग्राफिक तरीके हैं जो क्वांटम कंप्यूटर के खिलाफ सुरक्षित माने जाते हैं। अमेरिका की NIST (National Institute of Standards and Technology) ने अगस्त 2024 में ऐसे स्टैंडर्ड्स को फाइनल किया था। लेकिन, मौजूदा नेटवर्क को बदलना एक लंबी और जटिल प्रक्रिया है।

Naoris Protocol का क्वांटम-रेडी लॉन्च

इसी खतरे को देखते हुए, Naoris Protocol ने 1 अप्रैल, 2026 को अपना मेननेट लॉन्च किया है। यह शुरू से ही क्वांटम थ्रेट को ध्यान में रखकर बनाया गया है। इसकी आर्किटेक्चर में NIST-अप्रूव्ड पोस्ट-क्वांटम क्रिप्टोग्राफिक एल्गोरिदम का इस्तेमाल किया गया है, जिससे यह भविष्य के क्वांटम हमलों से सुरक्षित रहेगा। इसमें एक 'इररिवर्सिबल सिक्योरिटी ट्रांजीशन' सिस्टम भी है, जिसका मतलब है कि एक बार यूजर क्वांटम-रेसिस्टेंट कीज़ अपना लेते हैं, तो सभी भविष्य के ट्रांजैक्शन सुरक्षित प्रोटोकॉल का ही इस्तेमाल करेंगे। अपने टेस्टनेट के दौरान, Naoris Protocol ने 603 मिलियन से ज़्यादा थ्रेट्स को रोका और 106 मिलियन से ज़्यादा पोस्ट-क्वांटम ट्रांजैक्शन प्रोसेस किए। इसने दुनिया भर में 1 मिलियन से ज़्यादा सिक्योरिटी नोड्स को एक्टिवेट किया।

मार्केट वैल्यू बनाम क्वांटम रिस्क

भले ही क्वांटम-रेसिस्टेंट सिक्योरिटी की जरूरत बहुत ज़्यादा है, Naoris Protocol का मार्केट कैपिटलाइजेशन करीब $40 मिलियन के आसपास है। यह उन खरबों डॉलर की डिजिटल एसेट्स की तुलना में बहुत कम है जो क्वांटम एन्क्रिप्शन से खतरे में हैं। Naoris का मार्केट कैप Quantum Resistant Ledger (लगभग $54.7 मिलियन) और Cellframe (लगभग $32.8 मिलियन) जैसे अन्य क्वांटम-रेसिस्टेंट प्रोजेक्ट्स के बराबर है, लेकिन Nervos Network (लगभग $527 मिलियन) जैसे बड़े नेटवर्क से काफी छोटा है। हाल के आंकड़े बताते हैं कि NAORIS ने पिछले हफ्ते 7.1% की गिरावट के साथ शॉर्ट-टर्म में क्रिप्टो मार्केट का अंडरपरफॉर्मेंस किया है, हालांकि इसने लॉन्ग-टर्म में अच्छे रिटर्न दिए हैं। TradeGPT जैसे एनालिटिक्स टूल ने शॉर्ट-टर्म में सावधानी बरतने की सलाह दी है, क्योंकि ट्रेडिंग वॉल्यूम कम हो रहा है और मार्केट सेंटिमेंट सुस्त है।

चुनौतियां: स्केलिंग और व्यापक अपनाना

Naoris Protocol के मेननेट लॉन्च का प्रभाव फिलहाल सीमित है क्योंकि यह अभी केवल चुने हुए स्ट्रैटेजिक यूज़र्स और वैलिडेटर नोड्स के लिए इनवाइट-ओनली मोड में है। इस सीमित पहुंच से यह सवाल उठता है कि क्या यह अपनी क्वांटम-रेसिस्टेंट सिक्योरिटी को एक बड़े यूजर बेस तक पहुंचा पाएगा, जिसमें वॉलेट्स, एक्सचेंज और DeFi प्लेटफॉर्म्स शामिल हैं। टेस्टनेट से प्रोडक्शन एनवायरनमेंट में बड़ा इंटीग्रेशन एक अहम कदम होगा। प्रोजेक्ट ने $31 मिलियन से ज़्यादा फंड जुटाया है, लेकिन इसकी वर्तमान वैल्यूएशन और NAORIS टोकन की अस्थिरता बताती है कि निवेशकों का भरोसा अभी बढ़ रहा है।

आगे क्या: क्वांटम माइग्रेशन

Naoris Protocol का अपना PQC एप्रोच इसे एक अनोखी पोजिशन देता है, क्योंकि ब्लॉकचेन इंडस्ट्री क्वांटम-वल्नरेबल एन्क्रिप्शन से दूर जाने लगी है। NIST स्टैंडर्ड्स तय हो चुके हैं और Google जैसी टेक कंपनियां 2029 तक PQC माइग्रेशन का लक्ष्य बना रही हैं, जिससे क्वांटम-सेफ इंफ्रास्ट्रक्चर की मांग बढ़ने की उम्मीद है। Naoris Protocol की सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि वह अपने शुरुआती ग्रुप से आगे बढ़कर Web2 और Web3 इकोसिस्टम के साथ कैसे इंटीग्रेट होता है और अपने Decentralized Proof of Security (dPoSec) को कैसे साबित करता है। अगर यह सफल होता है, तो यह डिजिटल एसेट्स और इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए बढ़ते साइबर सिक्योरिटी मार्केट में एक बड़ा हिस्सा हासिल कर सकता है।

Disclaimer:This content is for informational purposes only and does not constitute financial or investment advice. Readers should consult a SEBI-registered advisor before making decisions. Investments are subject to market risks, and past performance does not guarantee future results. The publisher and authors are not liable for any losses. Accuracy and completeness are not guaranteed, and views expressed may not reflect the publication’s editorial stance.