Lido DAO का मानना है कि उनके LDO टोकन का मौजूदा वैल्यूएशन 'ऐतिहासिक रूप से दबा हुआ' (historically depressed) है। कंपनी को लगता है कि टोकन का मार्केट प्राइस, प्रोटोकॉल के मजबूत परफॉर्मेंस से मेल नहीं खा रहा है। LDO-to-ETH रेशियो भी पिछले दो साल के औसत से 70% तक कम हो गया है।
इस वैल्यूएशन गैप को पाटने के लिए, Lido DAO अपने 10,000 stETH तक का इस्तेमाल करेगी, जिसकी कीमत लगभग $20 मिलियन है। यह बायबैक टोकन की कीमत को सहारा देने का काम करेगा।
हालांकि, इस बायबैक को लागू करने में कुछ दिक्कतें भी हैं। LDO की ऑन-चेन लिक्विडिटी (on-chain liquidity) काफी कम है। बड़े ऑर्डर से टोकन की कीमत तेजी से बढ़ सकती है। ऐसे में, Lido को Binance, OKX, Bybit, Gate, और Bitget जैसे सेंट्रलाइज्ड एक्सचेंज (centralized exchanges) का सहारा लेना होगा, जहाँ ज्यादा लिक्विडिटी उपलब्ध है। बता दें कि LDO फिलहाल $0.30-$0.31 के आसपास ट्रेड कर रहा है, जो 2021 के अपने उच्चतम स्तर से 95% से अधिक की गिरावट है।
कंपनी अपने मजबूत फंडामेंटल्स का हवाला दे रही है। भले ही 2025 में रेवेन्यू 23% घटकर $40.5 मिलियन हो गया हो, लेकिन कोर प्रोटोकॉल परफॉर्मेंस मजबूत है। नेट रिवॉर्ड्स में करीब 20% की गिरावट आई, लेकिन ऑपरेशनल खर्च 13% सुधरा और टेक रेट (take rate) 5% से बढ़कर 6.11% हो गया।
यह स्थिति DeFi गवर्नेंस टोकन (DeFi governance tokens) के व्यापक री-वैल्यूएशन (re-valuation) को भी दर्शाती है। कई बड़े DeFi प्रोटोकॉल्स में टॉप 100 होल्डर्स 80% से ज्यादा टोकन कंट्रोल करते हैं, और पार्टिसिपेशन रेट 5-12% के बीच है। यह डीसेंट्रलाइजेशन (decentralization) और रेगुलेटरी जोखिमों पर सवाल खड़े करता है।
Lido, Ethereum लिक्विड स्टेकिंग (liquid staking) में लीडर बना हुआ है, लेकिन इसका मार्केट शेयर 31% से घटकर 23% रह गया है, क्योंकि EtherFi और Renzo जैसे कॉम्पिटिटर्स बढ़ रहे हैं। यह बायबैक LDO टोकन की वैल्यू को सपोर्ट करने का एक बड़ा कदम है, लेकिन इसका लॉन्ग-टर्म असर DeFi गवर्नेंस टोकन के व्यापक री-वैल्यूएशन पर निर्भर करेगा।