Japan Crypto News: अब जापान में क्रिप्टो को माना जाएगा 'फाइनेंशियल एसेट', नियमों में बड़ा बदलाव

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AuthorSaanvi Reddy|Published at:
Japan Crypto News: अब जापान में क्रिप्टो को माना जाएगा 'फाइनेंशियल एसेट', नियमों में बड़ा बदलाव

जापान सरकार ने बड़ा फैसला लेते हुए क्रिप्टोकरेंसी (Cryptocurrency) को 'फाइनेंशियल एसेट' यानी वित्तीय संपत्ति के तौर पर वर्गीकृत करने की मंजूरी दे दी है। इस कदम से डिजिटल एसेट्स पर अब सिक्योरिटीज जैसे नियम लागू होंगे, जिससे निवेशक सुरक्षा और बाजार की पारदर्शिता को बढ़ावा मिलेगा।

Detailed Coverage

क्रिप्टो के लिए सख्त होंगे नियम

जापान ने अपने कानूनों में अहम बदलाव किया है, जिसके तहत अब क्रिप्टोकरेंसी को 'पेमेंट सर्विसेज एक्ट' के तहत पेमेंट टूल की बजाय 'फाइनेंशियल एसेट' के रूप में देखा जाएगा। यह स्टॉक और बॉन्ड जैसे पारंपरिक निवेशों की तरह ही रेगुलेट होगा। नए नियमों में निवेशकों की सुरक्षा के लिए कड़े प्रावधान शामिल किए गए हैं, जैसे मार्केट मैनिपुलेशन और इनसाइडर ट्रेडिंग पर रोक। यह कदम पिछले कुछ सालों में Mt. Gox और Coincheck जैसे क्रिप्टो एक्सचेंज में हुई बड़ी सुरक्षा खामियों के बाद उठाया गया है, जिसका मकसद डिजिटल एसेट के जोखिम को कम करना है।

बड़े निवेशकों को मिलेगा बढ़ावा

जापान सरकार का मानना है कि डिजिटल एसेट्स को स्पष्ट कानूनी दर्जा मिलने से बड़े यानी इंस्टीट्यूशनल निवेशकों के लिए एक स्थिर माहौल बनेगा। मार्केट एक्सपर्ट्स का कहना है कि ऐसे निवेशक पारदर्शिता और जवाबदेही चाहते हैं, जो नए नियमों से पूरी होगी। फाइनेंशियल सर्विसेज एजेंसी (FSA) अब इन एसेट्स पर नजर रखेगी, जिससे यह साफ होता है कि दुनिया भर की बड़ी अर्थव्यवस्थाएं क्रिप्टो को सिर्फ सट्टेबाजी के बजाय एक वैध वित्तीय साधन के रूप में देख रही हैं।

टैक्स में भी बदलाव की उम्मीद

क्लासिफिकेशन बदलने के साथ-साथ, जापान क्रिप्टो पर लगने वाले टैक्स में भी बदलाव कर सकता है। रिपोर्ट्स के अनुसार, क्रिप्टो पर 20% का फ्लैट टैक्स रेट लागू हो सकता है, जो इक्विटी यानी शेयरों पर लगने वाले टैक्स जैसा ही होगा। इसमें निवेशकों को हुए नुकसान को आगे के सालों में एडजस्ट करने की सुविधा भी मिल सकती है। टैक्स की यह स्पष्टता निवेशकों के लिए अपने पोर्टफोलियो को बैलेंस करने में मददगार साबित हो सकती है।

भारत के लिए क्या है मायने?

भारतीय निवेशकों के लिए इसका सीधा असर कम है। भारत में डिजिटल एसेट्स पर टैक्स और मनी लॉन्ड्रिंग (AML) से जुड़े नियम लागू हैं, और क्रिप्टो कंपनियों को FIU-IND के साथ रजिस्टर करना होता है। भारत में अभी क्रिप्टो को कानूनी सिक्योरिटी या फाइनेंशियल एसेट का दर्जा नहीं मिला है। हालांकि, जापान जैसे बड़े देशों के इस कदम से ग्लोबल मार्केट में लिक्विडिटी और रेगुलेटरी स्टैंडर्ड्स पर असर पड़ सकता है। निवेशकों को इन वैश्विक बदलावों पर नजर रखनी चाहिए कि यह भारत जैसे अन्य देशों में भविष्य में नियमों पर कैसे असर डालता है।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.