क्यों गिरे क्रिप्टो में इनफ्लो?
JPMorgan की रिपोर्ट के अनुसार, 2026 की पहली तिमाही (Q1) में डिजिटल एसेट्स में निवेश करने के लिए आने वाले फंड में भारी कमी आई है। कुल मिलाकर करीब $11 बिलियन का इनफ्लो हुआ, जो पिछले साल की तुलना में एक-तिहाई कम है। रिपोर्ट के लीड एनालिस्ट Nikolaos Panigirtzoglou का कहना है कि रिटेल और इंस्टीट्यूशनल इन्वेस्टर्स (institutional investors) की तरफ से खास एक्टिविटी नहीं देखी गई। ज्यादातर इनफ्लो MicroStrategy Inc. द्वारा लगातार किए जा रहे बिटकॉइन (Bitcoin) की खरीद और कुछ चुनिंदा वेंचर कैपिटल (VC) डील्स से आया है।
बाज़ार में 20% की गिरावट, फिर संभाला
इस तिमाही में पूरे क्रिप्टो बाज़ार में लगभग 20% की बड़ी गिरावट दर्ज की गई। बिटकॉइन (BTC) की कीमत में करीब 23% और ईथर (Ether) की कीमत में 30% से ज़्यादा की गिरावट आई। यह हाल के दिनों में सबसे कमजोर पहली तिमाही में से एक रही। बाज़ार में यह गिरावट मंदी के दबाव और जियो-पॉलिटिकल टेंशन के चलते आई, जिससे रिस्क एसेट्स, खासकर ऑल्टकॉइन्स (altcoins) में भारी बिकवाली हुई। हालांकि, तिमाही के अंत के करीब कीमतों में थोड़ी रिकवरी देखी गई, और बिटकॉइन करीब $70,000 पर स्टेबल हो गया, जिसका श्रेय ईटीएफ (ETFs) में बढ़ती दिलचस्पी और बाज़ार की कुछ मजबूती को जाता है।
इनफ्लो के मुख्य स्रोत
JPMorgan की एनालिसिस में क्रिप्टो फंड्स, शिकागो मर्केंटाइल एक्सचेंज (CME) के फ्यूचर्स, वेंचर कैपिटल और कॉर्पोरेट ट्रेजरी (corporate treasuries) जैसे कई स्रोतों से होने वाले फंड फ्लो को कवर किया गया है। इस दौरान इंस्टीट्यूशनल इन्वेस्टर्स की तरफ से फ्यूचर्स में पोजीशन कम होने से उनकी दिलचस्पी कम दिखी। स्पॉट बिटकॉइन और ईथर ईटीएफ (ETFs) में भी शुरुआत में आउटफ्लो देखा गया, हालांकि मार्च में इसमें थोड़ी सुधार हुई। इनफ्लो के मुख्य स्रोत रहे कॉर्पोरेट ट्रेजरी, जिसमें ज़्यादातर MicroStrategy की स्टॉक के ज़रिए फाइनेंस की गई बिटकॉइन खरीद शामिल है, और क्रिप्टो वेंचर कैपिटल। माइनर्स (Miners) ने जितनी क्रिप्टो खरीदी, उससे ज़्यादा बेची, जिसे एनालिस्ट्स कंपनी की फाइनेंसिंग ज़रूरतों का नतीजा मान रहे हैं।
VC का फोकस बदला
क्रिप्टो वेंचर कैपिटल (VC) फंडिंग अभी भी मज़बूत बनी हुई है, और यह पिछले दो सालों की तुलना में तेज़ी से हो रही है। लेकिन अब फंडिंग कुछ चुनिंदा और बड़ी डील्स में सिमट रही है। इन्वेस्टर्स का फोकस अब इंफ्रास्ट्रक्चर, स्टेबलकॉइन्स, पेमेंट सॉल्यूशंस और टोकनाइजेशन (tokenization) की तरफ बढ़ा है। वहीं, गेमिंग, नॉन-फंजिबल टोकन (NFTs) और एक्सचेंज वेंचर्स में अब पहले जैसी दिलचस्पी नहीं दिख रही है।