Gen Z का क्रिप्टो में डेब्यू: WazirX के आंकड़ों से खुला चौंकाने वाला सच!

CRYPTO
Whalesbook Logo
AuthorSaanvi Reddy|Published at:
Gen Z का क्रिप्टो में डेब्यू: WazirX के आंकड़ों से खुला चौंकाने वाला सच!

WazirX के ताज़ा आंकड़ों के मुताबिक, भारत में लगभग **44.4%** Gen Z निवेशक अपनी फाइनेंसियल जर्नी की शुरुआत क्रिप्टोकरेंसी से कर रहे हैं। ये युवा यूटिलिटी टोकन और लगातार निवेश को तरजीह दे रहे हैं, पर इस सेक्टर में भारी वोलेटिलिटी और टैक्स का बड़ा जोखिम है। खास बात यह है कि छोटे शहरों से भी बड़ी संख्या में निवेशक जुड़ रहे हैं।

नए जमाने के निवेशक...

आजकल भारतीय निवेशक सीधे पारंपरिक रास्तों को छोड़कर सीधे डिजिटल एसेट्स में कदम रख रहे हैं। WazirX एक्सचेंज के आंकड़े बताते हैं कि लगभग 44.4% Gen Z निवेशक अपनी इन्वेस्टमेंट जर्नी की शुरुआत सीधे क्रिप्टो से कर रहे हैं। इन युवाओं की औसत उम्र 25 साल है और ये मार्केट में सक्रिय लोगों का चेहरा बदल रहे हैं।

छोटे शहरों का बढ़ा दबदबा

यह ट्रेंड सिर्फ बड़े शहरों तक ही सीमित नहीं है। आंकड़ों के अनुसार, 80% Gen Z यूज़र्स टॉप 10 शहरों के बाहर से हैं, जो टियर-2 और टियर-3 शहरों में रिटेल पार्टिसिपेशन के बड़े विस्तार को दिखाता है। 2026 की पहली छमाही में, WazirX पर हुए नए साइन-अप में 72% Gen Z थे और ये प्लेटफॉर्म के 32.1% एक्टिव ट्रेडर्स का हिस्सा थे। इन लोगों की सालाना कमाई ज़्यादातर ₹1 लाख से ₹5 लाख के बीच है, और इनमें बड़ी संख्या में स्टूडेंट्स और सेल्फ-एम्प्लॉयड प्रोफेशनल्स शामिल हैं।

पोर्टफोलियो में समझदारी?

यह आम धारणा के विपरीत है कि युवा केवल हाई-रिस्क वाले दांव खेलते हैं। प्लेटफॉर्म के डेटा से पता चलता है कि Gen Z एक स्ट्रक्चर्ड अप्रोच अपना रहा है। इन्होंने अपने पोर्टफोलियो का 59% यूटिलिटी-फोक्स्ड कैटेगरी जैसे DeFi, लेयर-2 इकोसिस्टम और पेमेंट टोकन में लगाया है। सिर्फ 16% एसेट्स मेमकोइन्स में और 25% स्थापित, लार्ज-कैप क्रिप्टो में रखे गए हैं। यह दिखाता है कि वे सिर्फ स्पेकुलेटिव एसेट्स के बजाय फंक्शनल यूज़ वाले प्रोजेक्ट्स पर ध्यान दे रहे हैं।

मुश्किल में भी निवेश जारी

बाजार में गिरावट के दौर में भी इस समूह ने मजबूती दिखाई है। लगभग 53% निवेशकों ने हल्के करेक्शन के दौरान भी खरीदारी जारी रखी, और 43% से ज़्यादा ने भारी गिरावट वाले दिनों में भी अपना निवेश जारी रखा। यह व्यवहार बताता है कि वे एक अनुशासित लॉन्ग-टर्म इन्वेस्टमेंट स्ट्रेटेजी की तरह एसेट्स जमा कर रहे हैं, हालांकि इसका नतीजा पारंपरिक इक्विटी इन्वेस्टिंग से अलग हो सकता है।

जोखिम और नियम...

हालांकि, इन आंकड़ों के साथ यह जानना भी ज़रूरी है कि क्रिप्टो सेक्टर में बड़े जोखिम हैं। डिजिटल एसेट्स की कीमतें तेज़ी से ऊपर-नीचे होती हैं, और भारत में रेगुलेटरी माहौल अभी भी जटिल है। क्रिप्टो पर 30% फ्लैट टैक्स और 1% TDS लगता है, जो रिटेल निवेशकों के मुनाफे को काफी कम कर सकता है। साथ ही, यह सेक्टर स्टॉक या म्यूचुअल फंड जैसे रेगुलेटेड प्रोडक्ट्स की सुरक्षा प्रदान नहीं करता। स्टूडेंट्स और कम आय वाले लोगों की बड़ी भागीदारी यह बताती है कि सावधानी ज़रूरी है, क्योंकि बाज़ार में बड़ी गिरावट से भारी पूंजी का नुकसान हो सकता है।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.