DeFi का नया अवतार: सट्टेबाजी छोड़ 'असली यूटिलिटी' पर फोकस, Institutions ने दिखाया भरोसा

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AuthorAditya Rao|Published at:
DeFi का नया अवतार: सट्टेबाजी छोड़ 'असली यूटिलिटी' पर फोकस, Institutions ने दिखाया भरोसा
Overview

डीसेंट्रलाइज्ड फाइनेंस (DeFi) की दुनिया में एक बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है। अब यह सिर्फ सट्टेबाजी (speculative) और ऊंचे रिटर्न (yield) पर नहीं, बल्कि असली 'यूटिलिटी' और इंस्टीट्यूशनल (institutional) इस्तेमाल पर ध्यान केंद्रित कर रहा है।

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'DeFi' अब सट्टेबाजी नहीं, असली उपयोगिता की ओर

डीसेंट्रलाइज्ड फाइनेंस (DeFi) का क्षेत्र एक बड़े बदलाव से गुजर रहा है। अब यह सट्टेबाजी वाले मॉडल और टिकाऊ न रहने वाले टोकन (token) मॉडल से हटकर असली उपयोगिता, मजबूत इंफ्रास्ट्रक्चर और साबित मूल्य पर ध्यान केंद्रित कर रहा है। इस बीच, ZeroLend जैसे प्रोजेक्ट कमजोर मार्जिन और सुरक्षा मुद्दों के कारण बंद हो गए हैं।

Institutions का भरोसा बढ़ा

इंस्टीट्यूशनल कैपिटल (Institutional capital) अब साबित DeFi इंफ्रास्ट्रक्चर की ओर बढ़ रहा है। Apollo Global Management ने Morpho में बड़ा निवेश किया है, जो प्रोटोकॉल की लेंडिंग (lending) मार्केट क्षमताओं में मजबूत विश्वास दिखाता है। इसी तरह, BlackRock ने Uniswap में निवेश किया था, जो DeFi की क्षमता को मान्य करता है। Aave, जो पहले से ही एक प्रमुख खिलाड़ी है, अप्रैल 2026 तक DeFi में टोटल वैल्यू लॉक्ड (TVL) का लगभग 30% हिस्सा रखता है। यह दिखाता है कि कैपिटल अब गहराई से लिक्विड और ऑडिटेड प्लेटफॉर्म्स में केंद्रित हो रही है।

स्टेबलकॉइन्स और रियल एसेट्स का दबदबा

इस बाजार बदलाव के बीच, स्टेबलकॉइन्स (stablecoins) एक महत्वपूर्ण वित्तीय इंफ्रास्ट्रक्चर बन गए हैं। 2026 की शुरुआत तक इनका मार्केट कैप $312 बिलियन से अधिक हो गया था, और साल के अंत तक $1 ट्रिलियन तक पहुंचने की उम्मीद है। इसका मुख्य कारण पेमेंट (payment) और लेंडिंग में इनकी उपयोगिता है। अकेले 2025 में ट्रांजेक्शन वॉल्यूम $33 ट्रिलियन तक पहुंच गया। साथ ही, रियल-वर्ल्ड एसेट्स (RWAs) को टोकनाइज (tokenize) करने की प्रक्रिया भी तेज हो रही है, जिससे Institutions को परिचित जोखिम और कानूनी नियंत्रण बनाए रखते हुए DeFi का उपयोग करने की सुविधा मिल रही है।

रेगुलेशन से मिली स्पष्टता, लेकिन जोखिम बरकरार

रेगुलेशन (regulation) से स्पष्टता तो आई है, पर चुनौतियां अभी भी हैं। यूरोप का Markets in Crypto-Assets (MiCA) फ्रेमवर्क, जो 2024 के अंत से पूरी तरह लागू है, क्रिप्टो इश्यूअर्स (issuers) और प्रोवाइडर्स (providers) के लिए नियम तय करता है। अमेरिका में, GENIUS Act जैसे लेजिस्लेशन (legislation) ने स्टेबलकॉइन्स के लिए एक फ्रेमवर्क बनाया। हालांकि, स्मार्ट कॉन्ट्रैक्ट (smart contract) में हैकिंग जैसे सिस्टमैटिक जोखिम बने हुए हैं। अप्रैल 2026 में Drift Protocol पर हुए $285 मिलियन के हैक ने इसे साबित किया। AI (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस) का बढ़ता दखल भी नई चुनौतियां पेश कर रहा है।

कमजोर DeFi प्रोजेक्ट्स पर गिरी गाज

जहां इंस्टीट्यूशनल कैपिटल और रेगुलेशन से स्थिति बेहतर हो रही है, वहीं कमजोर DeFi प्लेयर्स के लिए यह समय कठिन है। प्रमुख ब्लॉकचेन्स पर टोटल वैल्यू लॉक्ड (TVL) में बड़ी गिरावट आई है; इथेरियम (Ethereum) का TVL अगस्त 2025 के शिखर से 25% से अधिक गिर गया है। ऐसे प्रोटोकॉल जो टोकन एमिशन (token emissions) या टिकाऊ न रहने वाले यील्ड पर बहुत अधिक निर्भर थे, संघर्ष कर रहे हैं। कई DeFi लेंडिंग रेट्स अब पारंपरिक फाइनेंस सेविंग्स अकाउंट से भी कम हो गए हैं।

DeFi का 'ऑन-चेन फाइनेंस' (OnFi) में विकास

DeFi अब "ऑन-चेन फाइनेंस" (OnFi) के रूप में विकसित हो रहा है, जो एक प्रोफेशनल-ग्रेड फाइनेंशियल सिस्टम है जहां कंप्लायंस (compliance) टूल्स और इंस्टीट्यूशनल इंफ्रास्ट्रक्चर सबसे महत्वपूर्ण हैं। AI और ब्लॉकचेन का संगम (convergence) वेरिफिएबल डेटा (verifiable data) और ऑटोमेटेड ट्रस्ट (automated trust) के लिए एक नया पैराडाइम (paradigm) बनाने के लिए तैयार है। सुरक्षा उल्लंघन (security breaches) और रेगुलेटरी अस्पष्टता (regulatory ambiguity) जैसी चुनौतियां अभी भी बनी हुई हैं, लेकिन यह ट्रेंड पारदर्शिता, दक्षता और प्रोग्रामेबल एसेट्स (programmable assets) की मांग के कारण पारंपरिक फाइनेंस के साथ अधिक एकीकरण की ओर इशारा करता है।

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Disclaimer:This content is for educational and informational purposes only and does not constitute investment, financial, or trading advice, nor a recommendation to buy or sell any securities. Readers should consult a SEBI-registered advisor before making investment decisions, as markets involve risk and past performance does not guarantee future results. The publisher and authors accept no liability for any losses. Some content may be AI-generated and may contain errors; accuracy and completeness are not guaranteed. Views expressed do not reflect the publication’s editorial stance.