रिजर्व को लेकर सेंट्रल बैंक का Pragmatic रवैया
Czech National Bank (CNB) डिजिटल एसेट्स की दुनिया में कदम रख रहा है, लेकिन बेहद सावधानी से। बैंक ने $1 मिलियन का एक 'टेस्ट पोर्टफोलियो' तैयार किया है, जिसमें Bitcoin, एक USD स्टेबलकॉइन (stablecoin) और एक टोकनाइज्ड बैंक डिपॉजिट (tokenized bank deposit) शामिल हैं। इसका मकसद Bitcoin जैसी नई टेक्नोलॉजी को समझना, कस्टडी (custody) और सिक्योरिटी (security) जैसी प्रक्रियाओं को टेस्ट करना है। यह तुरंत निवेश का फैसला नहीं है, बल्कि भविष्य के लिए तैयारी है। गवर्नर Alex Michl का कहना है कि यह 2025 के अंत में अप्रूव हुआ एक एक्सपरिमेंटल (experimental) प्रोजेक्ट है।
अस्थिरता का पैमाना और Diversification पर बहस
गवर्नर Michl ने Bitcoin की खासियतें भी मानीं। उन्होंने कहा कि Bitcoin पारंपरिक एसेट्स (traditional assets) से कम कोरिलेशन (correlation) रखता है और लॉन्ग-टर्म (long-term) में हाई रिटर्न्स (high returns) दे सकता है। यह पोर्टफोलियो को और बेहतर बना सकता है, खासकर वेंचर कैपिटल (venture capital) निवेश की तरह। लेकिन, बैंक का मुख्य फोकस रिस्क मैनेजमेंट (risk management) है। Michl ने Bitcoin की 'अत्यधिक अस्थिरता' (extreme volatility) और इसके 'शून्य' हो जाने के जोखिम को सबसे बड़ा कारण बताया, जिसके चलते इसे फॉरेन एक्सचेंज रिजर्व में शामिल नहीं किया जा सकता। CNB की एक स्टडी में 1% आवंटन से रिटर्न बढ़ाने की संभावना दिखी थी, पर कैपिटल प्रिजर्वेशन (capital preservation) को प्राथमिकता दी गई। गोल्ड (Gold) को अभी भी सबसे स्थिर माना जा रहा है।
ग्लोबल सेंट्रल बैंक्स का सतर्क रुख
CNB का यह कदम कई ग्लोबल सेंट्रल बैंक्स के सतर्क रुख को दर्शाता है। दुनिया भर में कई सेंट्रल बैंक्स सेंट्रल बैंक डिजिटल करेंसी (CBDCs) पर काम कर रहे हैं, लेकिन सीधे तौर पर Bitcoin जैसे क्रिप्टो के रिजर्व में सीधे निवेश करना अभी भी बहुत दुर्लभ है। 2025 के एक सर्वे के मुताबिक, सेंट्रल बैंक्स का डिजिटल एसेट निवेश पर भरोसा काफी कम हुआ है। पहले जहां 15.9% सेंट्रल बैंक्स डिजिटल एसेट निवेश पर विचार कर रहे थे, वहीं अब यह संख्या घटकर सिर्फ 2.1% रह गई है, जो अगले 5-10 सालों में ऐसी उम्मीद रखते हैं।
जोखिम का बड़ा फैक्टर: रिजर्व मैनेजमेंट
सेंट्रल बैंक्स के लिए Bitcoin को रिजर्व में न रखने का सबसे बड़ा कारण इसकी 'अत्यधिक अस्थिरता' है, जो गोल्ड और स्टॉक मार्केट से कहीं ज्यादा है। Bitcoin में वो 'सेफ-हेवन' (safe-haven) वाली प्रॉपर्टी नहीं है जो गोल्ड में है। मार्केट में स्ट्रेस (stress) होने पर यह अक्सर रिस्क एसेट्स की तरह ही गिरता है, न कि उनसे बचाव करता है। इसके अलावा, लिक्विडिटी (liquidity) की कमी और क्रॉस-बॉर्डर ट्रेड (cross-border trade) में सीमित इस्तेमाल भी इसे रिजर्व मैनेजरों के लिए एक बड़ी चुनौती पेश करता है।
भविष्य की राह
गवर्नर Michl के इस टेस्ट प्रोग्राम से यह साफ है कि CNB नई वित्तीय टेक्नोलॉजीज को समझने के लिए तैयार है। हालांकि, Bitcoin को सीधे रिजर्व में शामिल करने का रास्ता फिलहाल बंद है। इस पायलट प्रोजेक्ट से मिले नतीजों का इंतजार 2 से 3 साल में होगा, जो शायद भविष्य में दूसरे सेंट्रल बैंक्स के लिए भी एक संकेत साबित हो सकते हैं। यह देखना दिलचस्प होगा कि आने वाले समय में क्या सेंट्रल बैंक्स का रुख बदलता है या रिस्क मैनेजमेंट ही प्राथमिकता बना रहता है।
