Crypto-to-Voucher Payments: भारतीय नियामकों की रडार पर क्रिप्टो का नया दांव, जांच के घेरे में प्लेटफॉर्म्स

CRYPTO
Whalesbook Logo
AuthorKaran Malhotra|Published at:
Crypto-to-Voucher Payments: भारतीय नियामकों की रडार पर क्रिप्टो का नया दांव, जांच के घेरे में प्लेटफॉर्म्स

विदेशी प्लेटफॉर्म्स भारतीय यूजर्स को क्रिप्टो एसेट्स को लोकल गिफ्ट कार्ड्स में बदलने की सुविधा दे रहे हैं, जिससे बैंकिंग सिस्टम पूरी तरह बाईपास हो रहा है। सरकार ने टैक्स चोरी और मनी लॉन्ड्रिंग के खतरों के बीच इस पूरे नेटवर्क की जांच शुरू कर दी है।

भारत में एक ऐसा नया पेमेंट लूप सामने आया है, जो सीधे तौर पर सरकारी एजेंसियों—खासकर वित्त और गृह मंत्रालय—के निशाने पर है। इस सिस्टम के तहत, भारतीय यूजर्स अपनी क्रिप्टोकरेंसी को विदेशी प्लेटफॉर्म्स के जरिए डिजिटल वाउचर या गिफ्ट कार्ड्स में बदल रहे हैं।\n\n### यह पेमेंट लूप कैसे काम करता है?\n\nपूरी प्रक्रिया काफी चालाकी से डिजाइन की गई है। यूजर्स अपने निजी वॉलेट से स्टेबलकॉइन्स (Stablecoins) जैसे क्रिप्टो एसेट्स विदेशी वेबसाइट्स पर भेजते हैं। इसके बदले, ये प्लेटफॉर्म्स उन्हें ऐसे वाउचर देते हैं जिन्हें भारत के रिटेल स्टोर्स पर ग्रोसरी, फ्यूल, ज्वेलरी या मोबाइल रिचार्ज के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है। विदेशी प्लेटफॉर्म्स भारत में मौजूद वाउचर एग्रीगेटर्स के साथ मिलकर पेमेंट सेटल करते हैं, जिससे पूरी ट्रांजैक्शन बिना भारतीय बैंकिंग सिस्टम में आए पूरी हो जाती है।\n\nइस प्रक्रिया की सबसे बड़ी चिंता यह है कि यह पूरी तरह से केवाईसी (KYC) और ट्रांजैक्शन रिपोर्टिंग के नियमों से बच जाती है, जिनका पालन भारतीय क्रिप्टो एक्सचेंज को करना अनिवार्य है। एक रिपोर्ट के मुताबिक, एक विदेशी ऑपरेटर ने ही भारत में 1.6 करोड़ से ज्यादा कार्ड्स जारी किए हैं, जो इस गोरखधंधे के बड़े स्तर को दर्शाता है।\n\n### रेगुलेटरी और फाइनेंशियल रिस्क\n\nनियामकों के सामने सबसे बड़ी चुनौती यह है कि ये वाउचर 'क्लोज्ड-लूप' प्रीपेड इंस्ट्रूमेंट्स के रूप में काम करते हैं, जो अब तक भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की निगरानी से बाहर थे। हालांकि, क्रिप्टो और घरेलू शॉपिंग को जोड़कर इन्होंने सीमा पार पैसे भेजने का एक ऐसा रास्ता बना लिया है, जिसे ट्रैक करना मुश्किल है। अधिकारियों को डर है कि इससे न केवल टैक्स की चोरी हो रही है, बल्कि मनी लॉन्ड्रिंग (AML) के प्रोटोकॉल भी पूरी तरह ताक पर रख दिए गए हैं।\n\n### पेमेंट सेक्टर के लिए क्या हैं मायने?\n\nअगर सरकार इस प्रक्रिया को क्रॉस-बॉर्डर पेमेंट मैकेनिज्म मान लेती है, तो पूरे वाउचर सप्लाई चेन में सख्ती बढ़ सकती है। इससे न केवल विदेशी प्लेटफॉर्म्स, बल्कि स्थानीय एग्रीगेटर्स और फिनटेक कंपनियों को भी नई कंप्लायंस गाइडलाइंस और सख्त वेरिफिकेशन प्रोसेस का सामना करना पड़ सकता है। आने वाले समय में सरकार की ओर से नई रिपोर्टिंग स्टैंडर्ड्स जारी किए जा सकते हैं ताकि देश की आर्थिक सुरक्षा के साथ कोई समझौता न हो।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.