कैपिटल रोटेशन का असर
डिजिटल एसेट्स में यह गिरावट निवेशकों की बदलती पसंद का नतीजा है। भले ही रिटेल निवेशक डरे हुए हों, लेकिन असल खेल बड़े संस्थानों का है। स्पॉट Bitcoin ETF से लगातार 13 दिनों से पैसा निकल रहा है, जिससे करीब $4.4 बिलियन का नेट आउटफ्लो हुआ है। यह पैसा सिर्फ बाजार से बाहर नहीं जा रहा, बल्कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) से जुड़े इक्विटी में लग रहा है। AI स्टॉक्स मजबूत कमाई और बायबैक के दम पर आगे बढ़ रहे हैं, जिससे क्रिप्टो मार्केट को लिक्विडिटी बनाए रखने में मुश्किल हो रही है।
Bitcoin और Ethereum का सपोर्ट
Bitcoin फिलहाल $62,000 के लेवल को बचाने की कोशिश कर रहा है। कई साइकोलॉजिकल सपोर्ट जोन टूट चुके हैं। टेक्निकल इंडिकेटर्स ओवरसोल्ड कंडीशन दिखा रहे हैं, यानी RSI में भारी बिकवाली का दबाव है। वहीं, Ethereum $1,700 के नीचे चला गया है, जो अप्रैल 2025 के बाद का सबसे निचला स्तर है। इस गिरावट की एक वजह Ethereum इकोसिस्टम में $400 मिलियन से ज्यादा की लिक्विडेशन भी है, जहां लीवरेज्ड लॉन्ग पोजिशंस खत्म हो रही हैं। ETH/BTC रेशियो में भी दबाव दिख रहा है, जो बताता है कि बड़े कॉइन से भी पैसा निकलकर अन्य ऑल्टकॉइन्स से तेजी से बाहर जा रहा है।
Zcash में आई दरार
बाजार की इस कमजोरी में Zcash की सुरक्षा खामी ने आग में घी का काम किया। Zcash के ऑर्चर्ड प्राइवेसी पूल में एक गंभीर बग का पता चला है, जो मई 2022 से मौजूद था। इस खामी से थ्योरेटिकली अनगिनत, अनडिटेक्टेबल ZEC टोकन बनाए जा सकते थे। Zcash टीम ने हालांकि इमरजेंसी फिक्स जारी कर दिया है, लेकिन यह पता लगाना मुश्किल है कि पैच से पहले इसका गलत इस्तेमाल हुआ या नहीं। इस अनिश्चितता के कारण Zcash की कीमत एक ही दिन में 30% से ज्यादा गिर गई। इस घटना ने प्राइवेसी-प्रोटेक्टिंग प्रोटोकॉल की व्यवहार्यता पर बहस छेड़ दी है।
आगे का रास्ता कैसा?
फिलहाल बाजार को लेकर सावधानी बनी हुई है। संस्थागत निवेशकों का फ्लो ही मुख्य इंडिकेटर रहेगा। फ्यूचर्स मार्केट में लगातार लिक्विडेशन से पता चलता है कि वोलैटिलिटी तब तक जारी रहेगी जब तक फंडिंग रेट्स नॉर्मल नहीं हो जाते। हालांकि कुछ एक्सपर्ट्स का मानना है कि लॉन्ग-टर्म होल्डर्स अभी 2022 की तरह पूरी तरह नहीं बिके हैं, लेकिन फ्रेश डिमांड की कमी एक बड़ी कमजोरी बनी हुई है। भविष्य में कीमतों की दिशा इस बात पर निर्भर करेगी कि ETF से पैसा निकलना बंद होता है या नहीं, और मैक्रो इकोनॉमिक डेटा (खासकर महंगाई और रोजगार के आंकड़े) निवेशकों को रिस्क-ऑन एसेट्स की ओर आकर्षित करते हैं या नहीं।
