Bitcoin में आई भारी गिरावट: ₹66,000 के नीचे फिसला, निवेशकों में दहशत!

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AuthorSaanvi Reddy|Published at:
Bitcoin में आई भारी गिरावट: ₹66,000 के नीचे फिसला, निवेशकों में दहशत!
Overview

बढ़ती महंगाई की चिंताओं और फेडरल रिजर्व (Federal Reserve) के संकेतों के चलते ग्लोबल मार्केट में बड़ी गिरावट आई है। इसका सीधा असर क्रिप्टो मार्केट पर दिखा, जहां Bitcoin **$66,000** के स्तर के नीचे जा फिसला। इस बिकवाली (sell-off) ने Coinbase और MicroStrategy जैसे प्रमुख क्रिप्टो स्टॉक्स को भी भारी नुकसान पहुंचाया है।

ग्लोबल मार्केट से मिले कमजोर संकेतों और बढ़ती महंगाई की चिंताओं के बीच, निवेशकों का सेंटिमेंट (sentiment) पूरी तरह बदल गया है। एक ओर जहां पहले ब्याज दरों में कटौती की उम्मीदें थीं, वहीं अब फेडरल रिजर्व (Federal Reserve) की ओर से ब्याज दरें बढ़ाने के संकेत मिल रहे हैं। इस बड़े बदलाव का असर Bitcoin सहित सभी रिस्क एसेट्स (risk assets) पर देखा जा रहा है।

शुक्रवार, 27 मार्च 2026 को क्रिप्टो से जुड़े स्टॉक्स में भारी बिकवाली देखी गई। Bitcoin $66,000 के नीचे आ गया। Coinbase के शेयर करीब 7% गिरकर $200 के आसपास पहुंच गए, वहीं Bitcoin रखने वाली बड़ी कंपनी MicroStrategy (MSTR) के शेयर भी लगभग 6% लुढ़ककर $700 के करीब आ गए। Bitcoin माइनिंग कंपनियां जैसे Riot Platforms (RIOT) भी 5% से 8% तक गिरीं और $10 के आसपास ट्रेड कर रही थीं। ये क्रिप्टो स्टॉक्स अब हाई-ग्रोथ वाली टेक कंपनियों की तरह ही रिएक्ट कर रहे हैं, जिनके वैल्यूएशन (valuations) में भी गिरावट आई है क्योंकि ब्याज दरों के बढ़ने की उम्मीदें तेज हो गई हैं। यहां तक कि Nvidia (NVDA) जो $850 के आसपास ट्रेड कर रहा था, और Google (GOOG) तथा Microsoft (MSFT) भी दबाव महसूस कर रहे हैं।

फेडरल रिजर्व (Federal Reserve) इस समय एक मुश्किल आर्थिक चुनौती का सामना कर रहा है। एक तरफ तेल की कीमतें $90 प्रति बैरल के करीब पहुंच रही हैं, जो महंगाई बढ़ा सकती हैं, वहीं दूसरी ओर लेबर मार्केट (labor market) नाजुक बना हुआ है। फेड के अधिकारियों ने चिंता जताई है कि ऊंची ऊर्जा लागत उपभोक्ताओं के खर्च को कम कर सकती है। ऐसे में, मार्च 2026 के लिए महंगाई दर (Inflation) के आंकड़े चिंता बढ़ाने वाले हैं, जिसमें CPI 3.5% और PPI 4.0% बढ़ा है। इन आंकड़ों और सेंट्रल बैंक की कमेंट्री के बाद बॉन्ड यील्ड्स (bond yields) में भी हलचल देखी गई। 10-साल की ट्रेजरी यील्ड 4.5% के करीब जाने के बाद 4.4% पर आई, जबकि 2-साल की यील्ड 4.03% से गिरकर 3.91% हो गई।

इस हफ्ते की बाजार की चाल हमें 2025 की शुरुआत की याद दिलाती है, जब इसी तरह की महंगाई की चिंताएं और फेड की सख्त टिप्पणियों के कारण बाजार में बड़ी गिरावट आई थी। तब मार्च 2025 में, महंगाई की अनिश्चितता ने प्रमुख टेक इंडेक्स और क्रिप्टो एसेट्स में 5% से 10% तक की गिरावट ला दी थी। फिलहाल, Nasdaq 100 अपने जनवरी के हाई से 10% से ज्यादा गिर चुका है, और S&P 500 में 8.5% की गिरावट आई है। इस बिकवाली ने प्रमुख टेक स्टॉक्स, सोना, चांदी और Bitcoin के पीक मार्केट वैल्यूएशन से करीब $17 ट्रिलियन का सफाया कर दिया है। Bitcoin अपने अक्टूबर 2025 के $126,000 के हाई से 45% गिर चुका है, और चांदी भी जनवरी 2026 के हाई से 45% फिसल गई है।

हालांकि Nvidia, Google और Microsoft जैसी बड़ी टेक कंपनियों के लिए एनालिस्ट्स (analysts) की रेटिंग पॉजिटिव बनी हुई है, वहीं क्रिप्टो सेक्टर में कुछ अंतर्निहित स्ट्रक्चरल जोखिम (structural risks) हैं जो मौजूदा आर्थिक माहौल में और बढ़ गए हैं। MicroStrategy पर Bitcoin खरीदने के लिए लिए गए भारी कर्ज का बड़ा जोखिम है, खासकर अगर एसेट की कीमतें या ब्याज दरें नकारात्मक दिशा में जाती हैं। यह Coinbase से अलग है, जिसे रेगुलेटरी जांच का सामना करना पड़ रहा है, लेकिन उसके बैलेंस शीट पर Bitcoin की कीमतों के उतार-चढ़ाव का सीधा असर नहीं है। Bitcoin माइनिंग कंपनियां, जैसे Riot Platforms, बिजली की लागत और Bitcoin की कीमत के प्रति अत्यधिक संवेदनशील हैं, जो उन्हें डायवर्सिफाइड टेक फर्मों की तुलना में अधिक जोखिम भरा बनाती हैं।

बड़ी टेक कंपनियों के लिए एनालिस्ट्स के व्यू (views) ज्यादातर पॉजिटिव हैं, जो इकोनॉमी के स्थिर होने पर संभावित बढ़त का संकेत देते हैं। हालांकि, क्रिप्टो से जुड़े स्टॉक्स का आउटलुक (outlook) मिला-जुला है। कुछ एनालिस्ट्स Coinbase और MicroStrategy पर न्यूट्रल से पॉजिटिव राय रखते हैं, जो लॉन्ग-टर्म एडॉप्शन (long-term adoption) और Bitcoin के वैल्यू स्टोर (store of value) के रूप में भूमिका को देखते हैं। फिर भी, रेगुलेशन (regulation) और बाजार के उतार-चढ़ाव की चिंताएं बनी हुई हैं। माइनिंग स्टॉक्स को अक्सर सावधानी से देखा जाता है। आगे का भविष्य काफी हद तक फेडरल रिजर्व के अगले कदमों पर निर्भर करेगा। अगर महंगाई पर काबू पाने के लिए फेड और कड़े कदम उठाता है, तो रिस्क एसेट्स में मौजूदा बिकवाली और बढ़ सकती है। वहीं, अगर महंगाई के नरम पड़ने के संकेत मिलते हैं, तो कुछ राहत मिल सकती है।

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