भारत में क्रिप्टो कंपनियों ने चिंता जताई है कि **1% TDS** और **30% टैक्स** के कारण ट्रेडर्स विदेशी एक्सचेंजों का रुख कर रहे हैं। हालांकि, छोटे शहरों में डिजिटल एसेट्स की मांग अब भी बनी हुई है और इंडस्ट्री अब टोकनाइजेशन (Tokenization) की ओर बढ़ रही है।
टैक्स के बोझ तले दबी इंडस्ट्री
हाल ही में हुए Business Standard BFSI Insight Summit में इंडस्ट्री लीडर्स ने साफ किया है कि ट्रांजैक्शन पर लगने वाला 1% TDS कारोबार के लिए एक बड़ी रुकावट बन गया है। इस टैक्स की वजह से डोमेस्टिक प्लेटफॉर्म्स पर वॉल्यूम में गिरावट आई है, क्योंकि हाई-फ्रीक्वेंसी ट्रेडर्स अपनी लिक्विडिटी बचाने के लिए इंटरनेशनल एक्सचेंजों पर शिफ्ट हो रहे हैं।
इसके अलावा, डिजिटल एसेट्स के मुनाफे पर लगने वाला 30% फ्लैट टैक्स लॉन्ग-टर्म निवेशकों के लिए बड़ी बाधा बना हुआ है। विशेषज्ञों का मानना है कि इससे भारतीय रेगुलेटेड संस्थाओं का बिजनेस कम हो रहा है और यूजर्स ऐसे विदेशी प्लेटफॉर्म्स पर जा रहे हैं जहां सुरक्षा और पारदर्शिता के मानक भारतीय नियमों के बराबर नहीं हैं।
छोटे शहरों से बढ़ती उम्मीद
टैक्स की सख्ती के बावजूद, डिजिटल एसेट्स का अडॉप्शन रुक नहीं रहा है। टियर-II, III और IV शहरों से भागीदारी में इजाफा देखा गया है, जो साबित करता है कि रिटेल निवेशकों का इंटरेस्ट अब भी मजबूत है। अब इंडस्ट्री का फोकस सट्टा ट्रेडिंग से हटकर 'टोकनाइजेशन' और 'रियल-वर्ल्ड एसेट्स' की ओर शिफ्ट हो रहा है। ब्लॉकचेन टेक्नोलॉजी के जरिए रियल एसेट्स को डिजिटल रूप देने की कोशिशें चल रही हैं, जिससे नए तरह के फाइनेंशियल प्रोडक्ट्स मार्केट में आ सकते हैं। अब देखना यह है कि सरकार इनोवेशन और कंज्यूमर प्रोटेक्शन के बीच कैसा तालमेल बिठाती है।
