Coinbase ने भारत को अगले 18 से 24 महीनों के लिए अपना मुख्य इंटरनेशनल ग्रोथ मार्केट घोषित कर दिया है। कंपनी ने ऑपरेशंस शुरू करने के लिए फाइनेंशियल इंटेलिजेंस यूनिट (FIU) में रजिस्ट्रेशन भी करा लिया है, लेकिन भारत के 30% क्रिप्टो टैक्स और 1% TDS जैसे नियम बड़ी चुनौती बने हुए हैं।
रेगुलेटरी और विस्तार की रणनीति
क्रिप्टो एक्सचेंज Coinbase ने भारत में अपनी वापसी पक्की कर ली है। फाइनेंशियल इंटेलिजेंस यूनिट (FIU) के साथ रजिस्ट्रेशन के बाद कंपनी अब स्थानीय नियमों के तहत काम करने के लिए पूरी तरह तैयार है। यह कदम कंपनी की एंटी-मनी लॉन्ड्रिंग और टैक्स फ्रेमवर्क का पालन करने की प्रतिबद्धता को दर्शाता है। कंपनी का लक्ष्य सिर्फ क्रिप्टो ट्रेडिंग तक सीमित न रहकर एक ऐसा प्लेटफॉर्म बनाना है जहाँ डेरिवेटिव्स (Derivatives), टोकेनाइज्ड इक्विटीज और स्टेबलकॉइन्स जैसी सुविधाएं मिल सकें। साथ ही, UPI के जरिए डिपॉजिट और विड्रॉल को आसान बनाने की तैयारी है।
फाइनेंशियल हेल्थ और चुनौतियां
निवेशकों को कंपनी के हालिया नतीजों पर भी गौर करना चाहिए। Q2 2026 में कंपनी का रेवेन्यू $1.22 बिलियन रहा, लेकिन उसे $359 मिलियन का नेट लॉस हुआ है। NASDAQ पर लिस्टेड कंपनी का शेयर $187.16 पर बंद हुआ था। भारत में सबसे बड़ी बाधा यहाँ की टैक्स पॉलिसी है। 30% का क्रिप्टो टैक्स और 1% TDS की वजह से वॉल्यूम पर दबाव बना रहता है। अब देखना यह होगा कि क्या Coinbase इन कड़े नियमों के बावजूद भारतीय बाजार में अपनी मजबूत पकड़ बना पाती है या नहीं।
