प्रमुख इंडियन क्रिप्टो एक्सचेंज CoinDCX ने अपने वॉलेट मैनेजमेंट सिस्टम में खामी के चलते **$16 मिलियन** (करीब **₹130 करोड़** से ज्यादा) के नुकसान की पुष्टि की है। राहत की बात यह है कि कंपनी ने इस नुकसान का भार खुद उठाया है, जिससे किसी भी यूजर के अकाउंट पर इसका असर नहीं पड़ा है।
क्या थी तकनीकी खामी?
इस घटना की जड़ एक्सचेंज के 'डिपॉजिट-स्वीपिंग' सिस्टम में थी। जुलाई 2025 में हुई एक पुरानी डेटा चोरी की घटना में कुछ एन्क्रिप्शन कीज़ (Encryption Keys) चोरी हो गई थीं, जिनका इस्तेमाल हैकर्स ने इस बार पुराने और एक्टिव वॉलेट एड्रेस को निशाना बनाने के लिए किया। चूंकि ऑटोमेटेड सिस्टम ने इन पुराने वॉलेट्स से फंड निकाले जाने को डिटेक्ट नहीं किया, इसलिए हैकर्स लंबे समय तक पैसे निकालते रहे।
यूजर्स पर क्या पड़ा असर?
कंपनी ने साफ किया है कि इस नुकसान की भरपाई कंपनी खुद कर रही है, इसलिए किसी भी यूजर के अकाउंट बैलेंस पर आंच नहीं आई है। हालांकि, यह घटना एक फिनटेक कंपनी के लिए बड़ी चेतावनी है कि अगर पुराने सिस्टम (Legacy Infrastructure) की निगरानी रियल-टाइम में नहीं की जाती, तो किस तरह के रिस्क पैदा हो सकते हैं।
डिजिटल एसेट सेक्टर के लिए सबक
ट्रेडिशनल बैंकिंग के उलट, क्रिप्टो की दुनिया में तकनीकी चूक का मतलब स्थायी नुकसान हो सकता है। एक्सपर्ट्स का मानना है कि अब निवेशकों के लिए पारदर्शिता बहुत जरूरी हो गई है। यूजर्स को भविष्य में ऐसी कंपनियों को प्राथमिकता देनी चाहिए जो नियमित रूप से थर्ड-पार्टी सिक्योरिटी ऑडिट कराती हैं और अपनी कस्टडी प्रैक्टिस के बारे में स्पष्ट खुलासा करती हैं।
