BlackRock IBIT में ₹10,000 करोड़ से ज़्यादा की ब्लॉक डील! Bitcoin ETF से संस्थागत निवेशकों का मोहभंग?

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AuthorKaran Malhotra|Published at:
BlackRock IBIT में ₹10,000 करोड़ से ज़्यादा की ब्लॉक डील! Bitcoin ETF से संस्थागत निवेशकों का मोहभंग?
Overview

ब्लैकरॉक (BlackRock) के iShares Bitcoin Trust (IBIT) में **$1.26 बिलियन** यानी करीब **₹10,500 करोड़** से ज़्यादा की एक बड़ी ब्लॉक सेल (Block Sale) हुई है। यह तब हुआ है जब अमेरिकी स्पॉट बिटकॉइन ETF (Spot Bitcoin ETF) अपने सबसे मुश्किल दौर से गुजर रहे हैं और मई में **$2 बिलियन** से ज़्यादा का आउटफ्लो (Outflow) देखा गया है। यह बड़ी बिकवाली संस्थागत निवेशकों के डिजिटल एसेट्स से दूरी बनाने का संकेत दे रही है।

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संस्थागत निवेशकों ने क्यों बेचे Bitcoin?

26 मई को BlackRock के iShares Bitcoin Trust (IBIT) में $1.26 बिलियन यानी लगभग ₹10,500 करोड़ की यह ब्लॉक डील साल की शुरुआत से चल रहे संस्थागत खरीदारी के ट्रेंड के बिल्कुल उलट है। यह डील एक्सचेंज के बाहर 2.3% की छूट पर हुई, जिससे साफ है कि बेचने वाले ने कीमत से ज़्यादा तुरंत लिक्विडिटी (Liquidity) को तरजीह दी। यह सामान्य रीबैलेंसिंग (Rebalancing) से अलग एक बड़ा कदम है, जो किसी बड़े निवेशक द्वारा अपनी हिस्सेदारी घटाने का पक्का इरादा दिखाता है। यही ट्रेंड दूसरे बिटकॉइन ETF में भी देखा जा रहा है।

बाजार की बदली चाल

यह बिकवाली स्पॉट बिटकॉइन ETF के लिए मुश्किल समय में आई है, जो कई निगेटिव मैक्रो इकोनॉमिक दबावों (Macroeconomic Pressures) का सामना कर रहे हैं। मई का महीना खासकर खराब रहा, जिसमें कुल नेट आउटफ्लो लगभग $2.3 बिलियन यानी करीब ₹19,000 करोड़ रहा। यह नवंबर 2025 के बाद किसी एक महीने में सबसे ज़्यादा निकासी है। जहां पहले विश्लेषक ETF इनफ्लो (ETF Inflow) को बिटकॉइन की कीमत बढ़ाने वाला मुख्य इंजन मान रहे थे, वहीं यह गिरावट इस सपोर्ट स्ट्रक्चर के कमजोर होने का संकेत देती है। बिकवाली सिर्फ IBIT तक सीमित नहीं है; Fidelity के FBTC और दूसरे बड़े फंड्स ने भी लगातार निकासी झेली है।

इसके अलावा, कंपीटिशन (Competition) भी तस्वीर को और पेचीदा बना रहा है। ऐसा लग रहा है कि पैसा न सिर्फ क्रिप्टो सेक्टर से बाहर जा रहा है, बल्कि स्ट्रक्चर्ड प्रोडक्ट्स (Structured Products) की ओर भी मुड़ रहा है। जिन फंड्स में क्रिप्टो के नुकसान से सुरक्षा मिलती है, उनमें इनफ्लो देखा गया है, जबकि स्पॉट ETF भारी बिकवाली झेल रहे हैं। यह दिखाता है कि निवेशक अभी भी इस एसेट क्लास में रुचि रखते हैं, लेकिन वे वोलैटिलिटी (Volatility) को लेकर काफी ज़्यादा रिस्क-एवर (Risk-averse) हो गए हैं।

बियर केस (Bear Case) के पीछे की वजह

हालिया आउटफ्लो को बदलते मैक्रो इकोनॉमिक माहौल के नज़रिए से देखना चाहिए। बढ़े हुए बॉन्ड यील्ड (Bond Yields) और फेडरल रिजर्व (Federal Reserve) के हॉकिश रवैये (Hawkish Tone) ने बिटकॉइन जैसे नॉन-यील्डिंग एसेट्स (Non-yielding Assets) को रखने की अवसर लागत (Opportunity Cost) बढ़ा दी है। इसके अलावा, इस ब्लॉक सेल और CME फ्यूचर्स एक्टिविटी (CME Futures Activity) के बीच कोई कनेक्शन न होना, इस थ्योरी को गलत साबित करता है कि यह सिर्फ एक बेसिस ट्रेड अनवाइंड (Basis Trade Unwind) था। इसके बजाय, यह डेटा एक फंडामेंटल डी-रिस्किंग (De-risking) की ओर इशारा करता है।

मैनेजमेंट और रेगुलेटरी जोखिम (Regulatory Risks) भी चिंता का विषय बने हुए हैं। इस साल कुल नेट आउटफ्लो $4.5 बिलियन यानी करीब ₹37,500 करोड़ के पार पहुंच रहा है, जिससे अंडरलाइंग स्पॉट मार्केट की लिक्विडिटी पर लगातार दबाव बना हुआ है। अगर बिटकॉइन की कीमत $62,000 जैसे महत्वपूर्ण स्तरों से नीचे जाती है, तो ETF का रिफ्लेक्सिव नेचर (Reflexive Nature)—जहां आउटफ्लो होने पर मैनेजर को बिटकॉइन बेचना पड़ता है—डाउनवर्ड मोमेंटम (Downward Momentum) को और बढ़ा सकता है, जिससे बचे हुए निवेशकों के लिए मुश्किल खड़ी हो सकती है।

आगे का रास्ता?

बाजार के प्रतिभागी अभी यह समझने की कोशिश कर रहे हैं कि क्या यह ट्रेंड एक साइक्लिकल बॉटमिंग (Cyclical Bottoming) है या संस्थागत निवेशकों की रुचि में एक स्ट्रक्चरल बदलाव। हालांकि कुछ संकेत बताते हैं कि भारी आउटफ्लो अक्सर लोकल बॉटम से पहले आते हैं, लेकिन मौजूदा मैक्रो इकोनॉमिक माहौल—लंबे समय तक ऊंची ब्याज दरें और जियोपॉलिटिकल अनिश्चितता—एक बड़ी चुनौती बनी हुई है। निवेशकों को आगाह किया जाता है कि जब तक मैक्रो कंडीशन स्थिर नहीं होतीं, तब तक ETF इनफ्लो पर बुलिश कैटलिस्ट (Bullish Catalyst) के तौर पर भरोसा कमज़ोर रह सकता है, जिससे कीमतें एक वोलेटाइल और सीमित दायरे में फंसी रह सकती हैं।

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Disclaimer:This content is for educational and informational purposes only and does not constitute investment, financial, or trading advice, nor a recommendation to buy or sell any securities. Readers should consult a SEBI-registered advisor before making investment decisions, as markets involve risk and past performance does not guarantee future results. The publisher and authors accept no liability for any losses. Some content may be AI-generated and may contain errors; accuracy and completeness are not guaranteed. Views expressed do not reflect the publication’s editorial stance.