साल 2026 की पहली छमाही में Bitcoin की कीमतों में **32%** की बड़ी गिरावट आई है, लेकिन इसके बावजूद भारतीय ट्रेडर्स का भरोसा इस डिजिटल एसेट पर लगातार बढ़ रहा है।
ट्रेडिंग वॉल्यूम में उछाल
क्रिप्टो एक्सचेंज CoinSwitch के डेटा के मुताबिक, साल 2026 की पहली छमाही में कंपनी के प्लेटफॉर्म पर कुल स्पॉट-ट्रेडिंग वॉल्यूम में Bitcoin की हिस्सेदारी बढ़कर 16.7% हो गई है, जो पिछले साल इसी अवधि में महज 7.6% थी। यह आंकड़े तब सामने आए हैं जब Bitcoin की कीमत अक्टूबर 2025 के $126,080 के पीक से गिरकर जून 2026 तक करीब $59,500 के स्तर पर आ गई है।
टैक्स और रेगुलेटरी चुनौतियां
बाजार में इस उतार-चढ़ाव की मुख्य वजह ग्लोबल सेलिंग प्रेशर और बिटकॉइन-बेस्ड ETF से फंड्स का बाहर निकलना माना जा रहा है। वहीं, भारत में क्रिप्टो ट्रांजैक्शंस पर लगने वाला 1% TDS (टैक्स डिडक्टेड एट सोर्स) घरेलू एक्सचेंजों के लिए बड़ी चुनौती बना हुआ है। टैक्स के बोझ से बचने के लिए कई ट्रेडर्स अब अपना वॉल्यूम विदेशी (offshore) प्लेटफॉर्म्स पर शिफ्ट कर रहे हैं।
डेरिवेटिव्स और डेमोग्राफिक्स
WazirX के अनुसार, BTC/INR फ्यूचर्स कॉन्ट्रैक्ट्स अभी भी सबसे ज्यादा ट्रेड किए जाने वाले इंस्ट्रूमेंट्स में से एक हैं। इसके अलावा, क्रिप्टो का क्रेज अब सिर्फ बड़े शहरों तक सीमित नहीं है। डेटा बताता है कि एक्सचेंजों पर 82% से अधिक यूजर्स नॉन-मेट्रो शहरों से जुड़े हुए हैं, जो डिजिटल एसेट्स के प्रति बढ़ती जागरूकता का संकेत है। अब निवेशकों की नजर इस बात पर है कि क्या सरकार टैक्स नियमों में कोई बदलाव करती है, जिससे घरेलू प्लेटफॉर्म्स की लिक्विडिटी को बचाया जा सके।
