अगस्त की ऊंचाइयों से फिसलकर Bitcoin अब **$77,000** के आसपास ट्रेड कर रहा है। अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव और क्रूड ऑयल की कीमतों में उछाल ने निवेशकों को सतर्क कर दिया है। वहीं, सितंबर में फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरें बढ़ाने की संभावना **66%** तक पहुंच गई है।
वैश्विक तनाव और बढ़ती बॉन्ड यील्ड का असर
क्रिप्टो मार्केट में इस सुस्ती की सबसे बड़ी वजह अमेरिका और ईरान के बीच सैन्य तनाव है, जिसने कच्चे तेल की कीमतों को $95 प्रति बैरल तक धकेल दिया है। महंगाई के मोर्चे पर यह एक बड़ा जोखिम है। इसके साथ ही, अमेरिकी 10-वर्षीय ट्रेजरी यील्ड का 4.8% के करीब बने रहना निवेशकों को Bitcoin जैसे रिस्की एसेट्स से दूर कर रहा है, क्योंकि अब सरकारी बॉन्ड्स में भी सुरक्षित रिटर्न मिल रहा है।
फेडरल रिजर्व और लिक्विडिटी का संकट
बाजार की नजरें अब अमेरिकी फेडरल रिजर्व की ओर हैं। फेडरल रिजर्व के चेयरमैन केविन वॉर्श के संकेतों के बाद सितंबर में ब्याज दरें बढ़ने की संभावना 66% हो गई है। जब ब्याज दरें बढ़ती हैं, तो डॉलर मजबूत होता है और मार्केट से लिक्विडिटी कम हो जाती है, जिसका सीधा असर Bitcoin की कीमतों पर पड़ रहा है।
ETF इनफ्लो में भी दिखी अस्थिरता
अगस्त का महीना Bitcoin के लिए शानदार रहा था, जिसमें अमेरिकी स्पॉट Bitcoin ETFs में $3.52 बिलियन का नेट इनफ्लो दर्ज किया गया था। लेकिन सितंबर की शुरुआत से तस्वीर बदली है। अब बड़े इंस्टीट्यूशनल निवेशक खरीदारी करने के बजाय मुनाफावसूली (Profit booking) कर रहे हैं, जिससे कीमतों को मिलने वाला सपोर्ट कमजोर हो गया है।
तकनीकी विशेषज्ञों का मानना है कि $76,400 से $77,000 का दायरा फिलहाल एक महत्वपूर्ण सपोर्ट ज़ोन है। अगर Bitcoin इस स्तर को नहीं बचा पाता है, तो गिरावट बढ़ सकती है। फिलहाल, निवेशकों को कच्चे तेल की कीमतों और फेडरल रिजर्व के बयानों पर पैनी नजर रखने की जरूरत है।
