दुनिया की सबसे बड़ी क्रिप्टोकरेंसी Bitcoin में गिरावट का दौर जारी है। Bitcoin की कीमत घटकर लगभग **$58,991** पर आ गई है, जो पिछले हफ्ते के मुकाबले करीब **6%** कम है। ऐसा तब हो रहा है जब संस्थागत निवेशक जोखिम भरी संपत्तियों से अपनी हिस्सेदारी कम कर रहे हैं।
क्या हुआ?
1 जुलाई 2026 तक Bitcoin की कीमत $58,991.68 पर आ गई है। पिछले 24 घंटों में इसमें करीब 1.56% की गिरावट आई है, जबकि पिछले हफ्ते यह 5.84% लुढ़क गया। यह गिरावट Bitcoin को $58,000 के करीब ले आई है, जिसे विश्लेषक एक महत्वपूर्ण सपोर्ट लेवल मान रहे हैं। यह उस बड़े ट्रेंड का हिस्सा है जहां निवेशक ग्लोबल इकोनॉमिक अनिश्चितता के कारण अस्थिर संपत्तियों से हटकर सुरक्षित निवेश की ओर बढ़ रहे हैं।
मैक्रो इकोनॉमिक कारण
Bitcoin पर यह दबाव मुख्य रूप से अमेरिका के मैक्रो इकोनॉमिक फैक्टर्स से जुड़ा है। मजबूत होता अमेरिकी डॉलर आमतौर पर डॉलर-नॉमिनेटेड एसेट्स को ज्यादा आकर्षक बनाता है, जबकि ऊंचे ब्याज दरें Bitcoin जैसी नॉन-यील्डिंग एसेट्स की अपील कम कर देती हैं। संस्थागत निवेशक, जो अक्सर ETFs (एक्सचेंज ट्रेडेड फंड्स) के जरिए बड़ी पोजीशन रखते हैं, अब अपनी हिस्सेदारी घटा रहे हैं। यह पूंजी का बदलाव भविष्य की ब्याज दर नीतियों के संकेतों पर प्रतिक्रिया है, जो ग्लोबल मार्केट में जोखिम लेने की क्षमता को प्रभावित करता है।
'अंडरवाटर' सप्लाई का फैक्टर
मार्केट डेटा से पता चलता है कि Bitcoin की कुल सर्कुलेटिंग सप्लाई का लगभग 50% इस समय 'अंडरवाटर' पोजीशन में है। इसका सीधा मतलब यह है कि मौजूदा कीमत, खरीदारों द्वारा खरीदी गई कीमत से कम है। यह साइकोलॉजिकल दबाव बना सकता है, क्योंकि कुछ निवेशक घाटे में बेचने से हिचकिचा सकते हैं, जबकि अन्य रिकवरी का इंतजार कर सकते हैं। इसके बावजूद, ऑन-चेन डेटा बताता है कि लॉन्ग-टर्म होल्डर्स, जिन्हें मार्केट की भाषा में 'डायमंड हैंड्स' कहा जाता है, पैनिक सेलिंग के संकेत नहीं दिखा रहे हैं और कीमत गिरने पर भी खरीदारी कर रहे हैं।
टेक्निकल सपोर्ट और रेजिस्टेंस
टेक्निकल तौर पर, Bitcoin फिलहाल $58,000 से $59,000 के दायरे में कंसॉलिडेट हो रहा है। यह लेवल सपोर्ट का काम कर रहा है, जहां खरीदार ऐतिहासिक रूप से सक्रिय हुए हैं। अगर कीमत इस रेंज को होल्ड नहीं कर पाती है, तो मार्केट ऑब्जर्वर का मानना है कि यह $55,000 से $56,000 के जोन की ओर जा सकता है। ऊपर की ओर, $61,800 और $62,500 के बीच तत्काल रेजिस्टेंस दिख रहा है। ट्रेडिंग वॉल्यूम को बढ़ाने वाले किसी बड़े फैक्टर के अभाव में, मार्केट इसी पैटर्न में रह सकता है।
निवेशकों को क्या देखना चाहिए?
इस स्पेस पर नजर रखने वाले निवेशकों के लिए, सबसे महत्वपूर्ण इंडिकेटर ट्रेडिंग वॉल्यूम है। हालिया सुस्त वॉल्यूम यह बताता है कि खरीदारों या विक्रेताओं में से किसी का भी मजबूत विश्वास नहीं है। ट्रेंड में बदलाव की पुष्टि के लिए आमतौर पर वॉल्यूम में लगातार वृद्धि की आवश्यकता होती है। इसके अतिरिक्त, भारतीय निवेशकों को भारत में वर्चुअल डिजिटल एसेट्स के लिए रेगुलेटरी और टैक्स ढांचे पर ध्यान देना चाहिए, जिसमें ऐसी संपत्तियों से आय पर 30% टैक्स और लेनदेन पर 1% टीडीएस शामिल है। ये कारक इस एसेट क्लास में किसी भी निवेश रणनीति के नेट परिणाम को प्रभावित करते हैं। निवेशक बाजार के भरोसे में वापसी के संकेत के रूप में नई संस्थागत पूंजी के प्रवाह के संकेतों की भी तलाश कर सकते हैं।
