Nasdaq में **5%** की गिरावट के बाद क्रिप्टो मार्केट में भारी बिकवाली देखी गई है। पिछले **24** घंटों में **$1 बिलियन** से ज्यादा की क्रिप्टो पोजीशन लिक्विडेट हो गई हैं, जिससे निवेशकों में हड़कंप है।
6 नवंबर, 2026 को बिटकॉइन भारी दबाव में दिखा और इसकी कीमत गिरकर $75,000–$76,000 के स्तर पर आ गई। इस गिरावट की मुख्य वजह ग्लोबल मार्केट्स में आई कमजोरी है, जहां 5 नवंबर को अमेरिकी Nasdaq कंपोजिट इंडेक्स में 5% से ज्यादा की बड़ी गिरावट दर्ज की गई। यह घटना एक बार फिर दिखाती है कि टेक शेयरों और क्रिप्टो एसेट्स का मूवमेंट एक-दूसरे के कितने करीब है, क्योंकि दोनों को ही 'रिस्क-ऑन' एसेट माना जाता है।
क्यों हो रही है बाजार में सुधार?
यह गिरावट मुख्य रूप से आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और बड़ी टेक कंपनियों के शेयरों के री-इवैल्यूएशन की वजह से है। निवेशक अब AI सेक्टर की लंबी अवधि की सस्टेनेबिलिटी को लेकर सतर्क हो गए हैं, जिससे सेमीकंडक्टर और लार्ज-कैप टेक शेयरों में भारी बिकवाली हुई है। अमेरिकी चुनाव के बाद नए रेगुलेशंस की आशंका भी निवेशकों के डर को बढ़ा रही है।
लिक्विडेशन का क्या है गणित?
कीमतों में आई इस तेजी ने डेरिवेटिव मार्केट में चेन रिएक्शन पैदा कर दिया, जिससे 24 घंटे में $1 बिलियन से ज्यादा की पोजीशन लिक्विडेट हो गईं। खास बात यह है कि इन लिक्विडेशन में 90% 'लॉन्ग' बेट्स (ऊपर जाने के सौदे) थे। जब ट्रेडर्स की मार्जिन कम पड़ने लगी, तो प्लेटफॉर्म्स ने जबरन पोजीशन क्लोज कर दी, जिससे गिरावट और भी तेज हो गई।
आगे का रास्ता
बाजार के जानकारों का मानना है कि बिटकॉइन के लिए $75,000 का लेवल एक बड़ा सपोर्ट जोन है। अगर यह लेवल टूटता है, तो आगे और वोलेटिलिटी देखने को मिल सकती है। अब निवेशकों की नजर अमेरिकी आर्थिक आंकड़ों (एम्प्लॉयमेंट रिपोर्ट्स) पर टिकी है। बाजार में स्थिरता तभी लौटेगी जब Nasdaq जैसे इंडेक्स खुद को संभालें और रिस्क-सेंसिटिव एसेट्स में दोबारा कॉन्फिडेंस आए।
