Bitcoin: $87,000 के पार पहुंची क्रिप्टो की बादशाहत, ETF की भारी मांग से आई तूफानी तेजी

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AuthorAditi Chauhan|Published at:
Bitcoin: $87,000 के पार पहुंची क्रिप्टो की बादशाहत, ETF की भारी मांग से आई तूफानी तेजी

Bitcoin ने आठ महीनों का रिकॉर्ड तोड़ते हुए **$87,000** का आंकड़ा पार कर लिया है। अमेरिकी स्पॉट ETFs में भारी निवेश और शॉर्ट स्क्वीज के कारण यह उछाल आया है, लेकिन भारतीय निवेशकों को टैक्स और रिस्क के प्रति सावधान रहने की जरूरत है।

तेजी की असली वजह क्या है?

Bitcoin की कीमतों में यह उछाल $87,000 के स्तर पर पहुंच गया है, जो बीते आठ महीनों में सबसे अधिक है। इस तेजी के पीछे मुख्य रूप से दो कारण हैं: पहला, अमेरिकी स्पॉट एक्सचेंज-ट्रेडेड फंड्स (ETFs) में लगातार हो रही खरीदारी और दूसरा, मार्केट में आया एक जबरदस्त 'शॉर्ट स्क्वीज'। जब किसी एसेट की कीमत अचानक बढ़ती है, तो उसे दांव पर लगाने वाले शॉर्ट सेलर्स को अपने नुकसान को कम करने के लिए शेयर खरीदने पड़ते हैं, जिससे कीमत और ऊपर चली जाती है।

वैश्विक स्तर पर क्रिप्टो मार्केट कैप बढ़कर लगभग $2.92 ट्रिलियन हो गया है। इसके अलावा, कच्चे तेल की कीमतों में नरमी और अमेरिकी 10-वर्षीय ट्रेजरी यील्ड में कमी ने भी निवेशकों के रिस्क लेने की क्षमता को बढ़ाया है।

भारतीय निवेशकों के लिए जरूरी चेतावनी

ग्लोबल स्तर पर जो उत्साह दिख रहा है, भारत में निवेश का परिदृश्य उससे थोड़ा अलग है। भारत में क्रिप्टो से होने वाली इनकम पर 30% टैक्स लगता है और हर ट्रांजैक्शन पर 1% TDS का प्रावधान है, जो आपके नेट प्रॉफिट को काफी कम कर सकता है। सबसे अहम बात यह है कि सरकार ने स्पष्ट कर दिया है कि क्रिप्टो एसेट लीगल टेंडर नहीं हैं, यानी इन्हें स्टॉक्स या म्यूचुअल फंड्स की तरह रेगुलेटरी सुरक्षा नहीं मिलती है।

मार्केट एक्सपर्ट्स का मानना है कि $90,000 का स्तर एक महत्वपूर्ण साइकोलॉजिकल रेजिस्टेंस है। तेजी के इस दौर में निवेशकों को क्रिप्टो की अत्यधिक अस्थिरता (volatility) से सावधान रहना चाहिए, क्योंकि ऐसी बड़ी रैलियों के बाद अक्सर तेज गिरावट भी देखने को मिलती है।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.