Bitcoin: ₹80,000 पार जाने की कोशिश में! ETF की भारी डिमांड, पर बिकवाली का डर!

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AuthorMehul Desai|Published at:
Bitcoin: ₹80,000 पार जाने की कोशिश में! ETF की भारी डिमांड, पर बिकवाली का डर!
Overview

Bitcoin की कीमतों में जोरदार उछाल जारी है। पिछले **8 दिनों** से लगातार अमेरिकी स्पॉट Bitcoin ETF में **$2.10 बिलियन** तक का इनफ्लो (inflow) हुआ है, जिसने Bitcoin को **$68,000** से बढ़ाकर **$77,000** से ऊपर पहुंचा दिया है। मगर, अब यह डिजिटल करेंसी एक अहम रेजिस्टेंस लेवल **$80,100** के करीब पहुंच गई है, जहां हाल ही में खरीदे बैठे पुराने होल्डर्स का औसत खरीद मूल्य है। यह स्तर अक्सर प्रॉफिट-बुकिंग और बिकवाली का संकेत देता है, जो Bitcoin के अगले कदम को तय करेगा।

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Bitcoin की कीमतों में जारी तेजी के बीच, $80,100 का स्तर एक बड़ी चुनौती बनकर उभरा है।

यह वह अहम कीमत है जहां पिछले 155 दिनों में Bitcoin खरीदने वाले निवेशकों का औसत खरीद मूल्य है। इतिहास गवाह है कि इस लेवल को पार करने पर अक्सर खरीदार मुनाफावसूली के लिए बिकवाली करते हैं, जिससे कीमत में उतार-चढ़ाव आता है।

इस तेजी का मुख्य कारण अमेरिकी स्पॉट Bitcoin ETF में लगातार बना हुआ इनफ्लो है। पिछले 8 दिनों में इन ETF में कुल $2.10 बिलियन का निवेश आया है। खास तौर पर, BlackRock के iShares Bitcoin Trust (IBIT) ने 23 अप्रैल को हुए इनफ्लो का करीब 75% हिस्सा अपने नाम किया, हालांकि Fidelity के Wise Origin Bitcoin Fund (FBTC) में थोड़ी आउटफ्लो (outflow) देखी गई।

इस इंस्टीट्यूशनल डिमांड (institutional demand) ने Bitcoin की कीमत को $68,000 के स्तर से बढ़ाकर हाल ही में $78,000 के करीब पहुंचा दिया है। ऑन-चेन डेटा (on-chain data) के अनुसार, Bitcoin $78,100 के स्तर पर वापस आ गया है, जो जनवरी के मध्य के बाद से नहीं देखा गया था। यह मार्केट में एक सेहतमंद संकेत माना जा रहा है।

लेकिन $80,100 का रेजिस्टेंस लेवल अभी भी एक बड़ी रुकावट है। अगर Bitcoin इस स्तर से ऊपर निकलता है, तो हाल में खरीदे 54% से अधिक खरीदार मुनाफे में आ जाएंगे। ऐसे में, शॉर्ट-टर्म होल्डर्स (short-term holders) की ओर से मुनाफावसूली बढ़ सकती है।

असल में, इन शॉर्ट-टर्म होल्डर्स द्वारा बुक किए जा रहे मुनाफे में भारी उछाल आया है, जो प्रति घंटा $4.4 मिलियन तक पहुंच गया है। यह इस साल के हर लोकल पीक (local peak) से पहले देखे गए $1.5 मिलियन के स्तर से लगभग तीन गुना है।

ETF इनफ्लो का यह मौजूदा सिलसिला तब हुए नौ दिनों के एक ऐसे ही पैटर्न से मिलता-जुलता है, जिसने Bitcoin के अब तक के उच्चतम स्तर (all-time high) का रास्ता साफ किया था।

बाजार का सेंटिमेंट (sentiment) 'ग्रीड' (Greed) जोन में चला गया है। Crypto Fear & Greed Index 46 पर है, जो पिछले तीन महीनों का उच्चतम स्तर है। साथ ही, पर्पेचुअल फ्यूचर्स फंडिंग रेट्स (perpetual futures funding rates) नेगेटिव हैं, जिसका मतलब है कि शॉर्ट ट्रेडर्स लॉन्ग ट्रेडर्स को भुगतान कर रहे हैं। यह बाजार में शॉर्ट स्क्वीज़ (short squeeze) की संभावना को दर्शाता है, जो Bitcoin को $80,000 की ओर धकेल सकता है।

हालांकि, लगातार नेगेटिव फंडिंग रेट्स, हाई ओपन इंटरेस्ट (open interest) और मुनाफावसूली का दबाव मिलकर एक जटिल स्थिति बना रहे हैं। Bitcoin का कुल मार्केट वैल्यू (market value) करीब $1.56 ट्रिलियन है।

सबसे बड़ा रिस्क शॉर्ट-टर्म होल्डर्स की बिकवाली से है। जैसे ही Bitcoin $80,100 के करीब या उससे ऊपर जाता है, इन होल्डर्स के पास मुनाफा कमाने का मजबूत प्रोत्साहन होता है। यह स्थिति पहले भी कई बार देखी गई है, और हर बार यह कीमत में उछाल के चरम (peak) के साथ जुड़ी रही है। साथ ही, वैश्विक तनाव, जैसे हालिया US-China AI विवाद, क्रिप्टो मार्केट में निवेशकों के रिस्क लेने की क्षमता को कम कर सकते हैं, जिससे तेजी पर ब्रेक लग सकता है।

ETF इनफ्लो पॉजिटिव होने के बावजूद, यह संभव है कि यह सिर्फ शॉर्ट-टर्म होल्डर्स को एग्जिट (exit) का मौका दे रहा हो, जिससे रेजिस्टेंस पर ही बिकवाली का दबाव बढ़ जाए।

Bitcoin की ऐतिहासिक वोलेटिलिटी (volatility) एक लगातार चिंता का विषय बनी हुई है। $80,000 के स्तर को स्पष्ट रूप से तोड़ने में विफलता, खासकर लेवरेज्ड ट्रेडिंग (leveraged trading) वाले डेरिवेटिव्स मार्केट्स (derivatives markets) में, तेज गिरावट ला सकती है।

Bitcoin की आगे की दिशा इस बात पर निर्भर करेगी कि वह $80,100 के शॉर्ट-टर्म होल्डर कॉस्ट बेसिस (cost basis) को पार कर पाता है या नहीं। अगर यह स्तर स्पष्ट रूप से टूटता है और कीमत बनी रहती है, तो $86,000 से $90,000 तक की रेंज देखने को मिल सकती है। वहीं, अगर Bitcoin इस रेजिस्टेंस से नीचे गिरता है, तो यह $74,000 से $68,000 के सपोर्ट लेवल की ओर वापस आ सकता है। फैसला इसी पर होगा कि क्या नई डिमांड, मुनाफा कमाने वालों के बिकवाली के दबाव को सोख पाती है या नहीं।

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