Bitcoin के सामने एक नया और गंभीर खतरा मंडरा रहा है - क्वांटम कंप्यूटिंग (Quantum Computing)। माना जा रहा है कि भविष्य में बनने वाले शक्तिशाली क्वांटम कंप्यूटर मौजूदा क्रिप्टोग्राफी (Cryptography) को तोड़ सकते हैं, जिससे पब्लिक कीज़ (Public Keys) से प्राइवेट कीज़ (Private Keys) का पता लगाया जा सकता है। इस खतरे से निपटने के लिए, जेम्सन लॉप (Jameson Lopp) जैसे डेवलपर्स ने BIP-361 का प्रस्ताव दिया है। इसका मुख्य उद्देश्य लगभग 1.7 मिलियन Bitcoin को उन पुराने एड्रेस (Address) में फ्रीज करना है जो क्वांटम हमलों के प्रति संवेदनशील हैं। इन Coins के मालिकों को इन्हें क्वांटम-रेसिस्टेंट (Quantum-resistant) फॉर्मेट में बदलना होगा, वरना ये हमेशा के लिए बेकार हो सकती हैं। यह कदम नेटवर्क के भविष्य को सुरक्षित करने के लिए उठाया जा रहा है, लेकिन इसने काफी विवाद खड़ा कर दिया है। मौजूदा समय में Bitcoin का मार्केट कैप (Market Cap) लगभग $1.49 ट्रिलियन है, और पिछले 24 घंटों में $41 बिलियन का ट्रेड हुआ है, जो निवेशकों की गहरी रुचि दिखाता है।
इस प्लान पर सबसे बड़ा विवाद 'हार्ड फोर्क' (Hard Fork) बनाम 'सॉफ्ट फोर्क' (Soft Fork) की बहस है। कार्डानो (Cardano) के फाउंडर चार्ल्स होस्किंसन (Charles Hoskinson) का कहना है कि BIP-361, जिसे कुछ लोग सॉफ्ट फोर्क बता रहे हैं, असल में एक हार्ड फोर्क की मांग करता है। ऐसा इसलिए क्योंकि यह मौजूदा सिग्नेचर मेथड्स (Signature Methods) को अमान्य कर देगा। Bitcoin का डेवलपर समुदाय हार्ड फोर्क से बचने की सख्त कोशिश करता है, क्योंकि इससे नेटवर्क बंट सकता है और उसकी 'इम्म्यूटेबिलिटी' (Immutability) यानी अपरिवर्तनीयता कमजोर हो सकती है। होस्किंसन का तर्क है कि Bitcoin में कॉम्प्लेक्स टेक्निकल फैसलों को लेने के लिए कोई फॉर्मल गवर्नेंस (Formal Governance) सिस्टम नहीं है। ऐसे में, ये बहसें डेवलपर लिस्ट और सोशल कंसेंसस (Social Consensus) पर ही अटकी रह जाती हैं। यह गवर्नेंस गैप (Governance Gap) और भी बढ़ जाता है क्योंकि पुराने एड्रेस में Bitcoin की एक बड़ी मात्रा पड़ी हुई है। अनुमान है कि 34% से ज्यादा BTC खतरे में हो सकता है, जिसमें Satoshi Nakamoto द्वारा माइन किए गए 10 लाख से 11 लाख BTC भी शामिल हैं। ये शुरुआती Coins, BIP-39 जैसे स्टैंडर्ड्स से पहले माइन हुई थीं और इन्हें माइग्रेट करना नामुमकिन हो सकता है, जिससे वे हमेशा के लिए खो सकती हैं।
हालांकि BIP-361 तकनीकी रूप से प्रेरित है, लेकिन इसमें बड़े जोखिम भी हैं। आलोचकों का कहना है कि Bitcoin का गवर्नेंस सिस्टम बहुत धीमा है और डेडलॉक (Deadlock) का शिकार हो जाता है, खासकर जब कई धारकों को प्रभावित करने वाले बड़े बदलावों की बात आती है। वे पुराने Coins को बेकार बनाने की समय-सीमा के साथ अपग्रेड को मजबूर करना, यूजर कंट्रोल और नॉन-कंसेंशियल चेंज (Non-consensual Change) जैसे Bitcoin के मूल सिद्धांतों को चुनौती देने वाला एक 'जबरिया' कदम मानते हैं। कुछ आलोचक ऐसे प्लान्स को 'सत्तावादी और जब्त करने वाले' (Authoritarian and Confiscatory) तक कह रहे हैं। यह तरीका कम्युनिटी को बांट सकता है, यूजर्स को अलग-थलग कर सकता है और एक खतरनाक मिसाल कायम कर सकता है। यह सुनिश्चित करना कि सभी यूजर्स अपने पुराने Bitcoin को माइग्रेट कर लें, तकनीकी रूप से बेहद जटिल है। अगर वे ऐसा नहीं कर पाते हैं, तो किसी अटैक से नहीं, बल्कि सुरक्षा अपडेट पर सहमति न बन पाने के कारण अरबों डॉलर स्थायी रूप से खो सकते हैं। यह 'टेक्निकल डेट' (Technical Debt) और गवर्नेंस की लड़ाई Bitcoin की लॉन्ग-टर्म सिक्योरिटी (Long-term Security) के लिए एक बड़ी कमजोरी साबित हो सकती है।
विशेषज्ञों का अनुमान है कि क्रिप्टोग्राफिक रूप से मजबूत क्वांटम कंप्यूटर अगले 5 से 15 सालों में तैयार हो सकते हैं, हालांकि इसका विकास तेज़ी से हो रहा है। BIP-361 का प्रस्ताव दिखाता है कि कम्युनिटी इस टाइमलाइन को पहचान रही है और कार्रवाई की जरूरत महसूस कर रही है। यह बहस इस बात को तय करेगी कि Bitcoin भविष्य की तकनीकी बाधाओं से कैसे निपटेगा। अगर इसे अपनाया जाता है, तो BIP-361 की सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि नेटवर्क किसी बड़े अपग्रेड के लिए पर्याप्त आम सहमति बना पाता है या नहीं। कार्रवाई न करने पर नेटवर्क का एक बड़ा हिस्सा असुरक्षित रह सकता है। यह बहस डिसेंट्रलाइज्ड नेटवर्क (Decentralized Networks) में भविष्य के सुरक्षा खतरों से निपटने के लिए बेहतर गवर्नेंस सिस्टम की तत्काल आवश्यकता को उजागर करती है।