ग्लोबल इकोनॉमिक अनिश्चितता और बढ़ती बॉन्ड यील्ड्स के बीच Bitcoin का भाव गिरकर $77,000-$78,000 के दायरे में आ गया है। हालांकि, रिटेल निवेशकों की बिकवाली के बावजूद संस्थागत (Institutional) निवेशक ETF में लगातार निवेश कर रहे हैं।
अगस्त के अंत में $81,500 के स्तर को छूने के बाद बिटकॉइन में कमजोरी देखी जा रही है। मार्केट पर अमेरिकी इकोनॉमिक पॉलिसी और बढ़ती ब्याज दरों का साफ असर दिख रहा है।
क्यों बढ़ रहा है दबाव?
इस उतार-चढ़ाव की मुख्य वजह अमेरिकी 10-वर्षीय ट्रेजरी यील्ड में उछाल है, जो 4.8% के करीब पहुंच गई है। जब सुरक्षित सरकारी बॉन्ड पर रिटर्न बढ़ता है, तो निवेशक बिटकॉइन जैसे रिस्की एसेट्स से पैसा निकालकर बॉन्ड में शिफ्ट करने लगते हैं। इसके अलावा, फेड चेयर केविन वॉर्श के बयानों के बाद बाजार में सितंबर में ब्याज दरें बढ़ने की संभावना ने सेंटिमेंट को और बिगाड़ दिया है।
इंस्टीट्यूशनल डिमांड बनी उम्मीद
दिलचस्प बात यह है कि जहां रिटेल ट्रेडर्स मुनाफावसूली कर रहे हैं, वहीं संस्थागत निवेशक रुकने को तैयार नहीं हैं। अगस्त के दौरान अमेरिकी स्पॉट बिटकॉइन ETF में $3.52 बिलियन का नेट इनफ्लो दर्ज किया गया, जो अक्टूबर 2025 के बाद सबसे शानदार प्रदर्शन है। यह साफ संकेत है कि बड़े खिलाड़ी लंबी अवधि के लिए खरीदारी जारी रखे हुए हैं।
आगे क्या करें निवेशक?
मार्केट एक्सपर्ट्स फिलहाल $76,000 के सपोर्ट लेवल पर नजरें गड़ाए हुए हैं। अगर यह लेवल टूटता है, तो भाव $73,000 तक फिसल सकता है। ऊपर की तरफ $79,500 से $80,800 के बीच रेजिस्टेंस है। निवेशकों को सलाह है कि वे आगामी अमेरिकी इकोनॉमिक डेटा और ग्लोबल जियोपॉलिटिकल हालातों पर नजर रखें, क्योंकि ये फैक्टर्स सीधे रिस्क एसेट्स को प्रभावित कर रहे हैं।
