Bitcoin की कीमत $79,000 के आंकड़े को पार कर गई है। पिछले हफ्ते US Spot Exchange Traded Funds (ETFs) में करीब $2 अरब (लगभग ₹16,000 करोड़) के रिकॉर्ड इनफ्लो ने इस तेजी को सहारा दिया है। यह रैली कुछ हफ्तों के आउटफ्लो के बाद सेंटिमेंट में एक बड़े बदलाव का संकेत है, हालांकि विश्लेषकों ने $80,000 के आसपास संभावित रेजिस्टेंस की चेतावनी दी है।
Bitcoin में आई तूफानी तेजी, $79,000 के पार!
क्रिप्टोकरेंसी की दुनिया के किंग, Bitcoin ने बाजार में खलबली मचा दी है। कीमत $79,000 के पार निकल गई है, जो पिछले तीन सालों में सबसे बड़ी साप्ताहिक बढ़त है। इस दौरान Bitcoin करीब 23% चढ़ा है। इस रफ्तार की मुख्य वजह है अमेरिका में Spot Exchange Traded Funds (ETFs) में संस्थागत निवेशकों (Institutional Investors) का रिकॉर्ड निवेश। पिछले हफ्ते इन ETFs में करीब $2 अरब (लगभग ₹16,000 करोड़) का भारी पैसा आया है।
शॉर्ट स्क्वीज का कमाल!
इस प्राइस जंप के पीछे दो बड़े कारण हैं: पहला, संस्थागत निवेशकों की लगातार मांग और दूसरा, ट्रेडिंग मार्केट में आई शॉर्ट स्क्वीज (Short Squeeze) की घटना। जब Bitcoin की कीमत बढ़ी, तो जिन ट्रेडर्स ने इसके गिरने पर दांव लगाया था, उन्हें नुकसान से बचने के लिए Bitcoin खरीदना पड़ा। इससे कीमत और ऊपर चली गई। मार्केट डेटा के मुताबिक, हाल के दिनों में क्रिप्टो मार्केट में $4 अरब से ज्यादा की शॉर्ट पोजीशंस लिक्विडेट (Liquidation) हुई हैं।
BlackRock का बढ़ा दबदबा
BlackRock के iShares Bitcoin Trust ने इस ट्रेंड में अहम भूमिका निभाई है और कुल इनफ्लो में बड़ा योगदान दिया है। यह एक बड़ा यू-टर्न है, क्योंकि इससे ठीक एक हफ्ता पहले नेट आउटफ्लो देखा गया था, जो बताता है कि बड़े निवेशक इस एसेट क्लास में वापसी कर रहे हैं। इसके अलावा, US Treasury बॉन्ड बायबैक से जुड़ी लिक्विडिटी को लेकर बाजार की उम्मीदों ने भी इस रैली को हवा दी है।
$80,000 पर है अगली चुनौती
बाजार के जानकारों की नजरें अब $80,000 के लेवल पर टिकी हैं। इसे एक साइकोलॉजिकल रेजिस्टेंस (Psychological Resistance) माना जा रहा है, जहां प्रॉफिट बुकिंग के लिए सेलर एक्टिव हो सकते हैं और कीमत में कुछ स्थिरता आ सकती है। रिलेटिव स्ट्रेंथ इंडेक्स (RSI) जैसे टेक्निकल इंडिकेटर्स भी ओवरबॉट (Overbought) सिग्नल दे रहे हैं, जो बताते हैं कि इस तेज रफ्तार को बनाए रखने के लिए कंसोलिडेशन (Consolidation) की जरूरत पड़ सकती है।
आगे क्या?
इस रैली की असली परीक्षा यह है कि क्या ETF इनफ्लो का यह स्तर बना रहता है। अगर संस्थागत मांग कम होती है, तो बाजार में गिरावट आ सकती है। इसके अलावा, US इंटरेस्ट रेट पॉलिसी और भू-राजनीतिक तनाव जैसे बड़े आर्थिक कारक भी बाजार में वोलेटिलिटी (Volatility) बनाए रख सकते हैं। निवेशक इस पर नजर रख रहे हैं कि क्या मौजूदा बाइंग प्रेशर लॉन्ग-टर्म ट्रेंड है या हालिया लिक्विडेशन इवेंट्स का शॉर्ट-टर्म रिएक्शन। आने वाले दिनों में Bitcoin का $80,000 के लेवल पर कैसा प्रदर्शन रहता है, यह अहम होगा।
