Bitcoin ने $75,000 का आंकड़ा पार कर लिया है। अमेरिकी ट्रेजरी (US Treasury) द्वारा लॉन्ग-टर्म बॉन्ड बायबैक बढ़ाने के फैसले ने निवेशकों की चिंताएं बढ़ा दी हैं। वहीं, शॉर्ट पोजिशन (short-position) को लिक्विडेट (liquidate) करने की भारी लहर ने इस तेजी को और हवा दी है।
Bitcoin में क्यों आई इतनी तेजी?
21 अगस्त 2026 को Bitcoin की कीमत $75,000 के ऊपर पहुंच गई। यह पिछले हफ्ते से जारी शानदार प्रदर्शन का ही नतीजा है, जिसने ग्लोबल फाइनेंशियल मार्केट का ध्यान खींचा है। अमेरिकी ट्रेजरी ने ऐलान किया है कि वह लॉन्ग-टर्म बॉन्ड बायबैक ऑपरेशन्स (bond buyback operations) को दोगुना करेगा, यानी $2 बिलियन से बढ़ाकर कम से कम $4 बिलियन प्रति ऑपरेशन करेगा। यह प्रोग्राम 9 सितंबर से शुरू होकर नवंबर 2026 तक चलेगा।
'फिस्कल डोमिनेंस' का डर
निवेशक इस कदम को 'फिस्कल डोमिनेंस' (fiscal dominance) का संकेत मान रहे हैं। सीधे शब्दों में कहें तो, सरकार महंगाई जैसे आर्थिक लक्ष्यों के बजाय अपने भारी कर्ज को चुकाने को प्राथमिकता दे रही है। जब सरकार अपने कर्ज को वापस खरीदने के लिए मार्केट में लिक्विडिटी (liquidity) बढ़ाती है, तो करेंसी की वैल्यू घटने का डर पैदा होता है। ऐसे हालात में, बहुत से निवेशक Bitcoin जैसी एसेट्स (assets) की ओर रुख करते हैं, क्योंकि उन्हें लंबे समय में पारंपरिक करेंसी के मुकाबले इसकी वैल्यू सुरक्षित लगती है।
शॉर्ट स्क्वीज (Short Squeeze) का कमाल
मैक्रो-इकोनॉमिक (macro-economic) संकेतों के अलावा, शॉर्ट स्क्वीज (short squeeze) नामक टेक्निकल इवेंट (technical event) ने इस रैली की रफ्तार बढ़ाई। जैसे-जैसे Bitcoin की कीमत बढ़ी, जिन ट्रेडर्स (traders) ने इसके खिलाफ दांव लगाया था, उन्हें नुकसान से बचने के लिए अपनी पोजिशन बंद करनी पड़ी। मार्केट डेटा के मुताबिक, ट्रेजरी के ऐलान के बाद कुछ ही दिनों में $1 बिलियन से ज्यादा की शॉर्ट पोजिशन लिक्विडेट हुईं। इस जबरन खरीददारी ने थोड़े समय में कीमत को और तेजी से ऊपर धकेलने का काम किया।
वाशिंगटन से मिले संकेत
वाशिंगटन में हालिया राजनीतिक घटनाक्रमों ने भी सेंटीमेंट (sentiment) को सहारा दिया। प्रेसिडेंट डोनाल्ड ट्रम्प ने व्हाइट हाउस में प्रमुख क्रिप्टोकरेंसी (cryptocurrency) और टेक्नोलॉजी फर्मों के लीडर्स से मुलाकात की। इसमें Coinbase और Ripple जैसी कंपनियों के एग्जीक्यूटिव्स (executives) भी शामिल थे। चर्चा के दौरान, प्रेसिडेंट ने कांग्रेस से 'क्लैरिटी एक्ट' (Clarity Act) को आगे बढ़ाने का आग्रह किया। यह एक प्रस्तावित बिल है जिसका मकसद अमेरिका में डिजिटल एसेट्स के लिए एक स्पष्ट रेगुलेटरी फ्रेमवर्क (regulatory framework) तैयार करना है। हालांकि, यह बिल सीनेट (Senate) में अटका हुआ है, जिससे इंडस्ट्री फिलहाल रेगुलेटरी अनिश्चितता (regulatory limbo) में है।
आगे क्या?
इस उत्साह के बावजूद, मार्केट एनालिस्ट्स (analysts) निवेशकों को कुछ जोखिमों पर नज़र रखने की सलाह दे रहे हैं। कीमत में आई तेज उछाल के कारण वोलैटिलिटी (volatility) बढ़ गई है, और कुछ एक्सपर्ट्स का मानना है कि यह रैली फिलहाल लॉन्ग-टर्म डिमांड (long-term demand) के बजाय लिक्विडिटी और टेक्निकल फैक्टर्स (technical factors) से प्रेरित है। इसके अलावा, अमेरिकी इकोनॉमिक माहौल (economic environment) में अनिश्चितता बनी हुई है, और नेशनल डेफिसिट (national deficit) को लेकर चिंताएं सभी रिस्क-ऑन एसेट्स (risk-on assets) पर मंडरा रही हैं। फिलहाल, निवेशक इस बात पर ध्यान दे रहे हैं कि क्या यह मोमेंटम (momentum) बना रहता है या यह एक छोटी अवधि की राहत रैली साबित होती है।
