Bitcoin $60K के नीचे लुढ़का! 16 महीने का निचला स्तर, ग्लोबल क्रंच का बड़ा असर

CRYPTO
Whalesbook Logo
AuthorAditi Chauhan|Published at:
Bitcoin $60K के नीचे लुढ़का! 16 महीने का निचला स्तर, ग्लोबल क्रंच का बड़ा असर
Overview

Bitcoin के निवेशकों के लिए बुरी खबर है। ग्लोबल मार्केट में लिक्विडिटी (Liquidity) की तंगी और टेक्नोलॉजी स्टॉक्स (Technology Stocks) में बिकवाली के दबाव के कारण Bitcoin की कीमतों में भारी गिरावट आई है। यह क्रिप्टोकरेंसी **60,000 डॉलर** के अहम सपोर्ट लेवल को तोड़कर पिछले **16 महीनों** के सबसे निचले स्तर पर पहुंच गई है।

ग्लोबल लिक्विडिटी क्रंच का असर, Bitcoin $60K के नीचे

Bitcoin का 60,000 डॉलर के महत्वपूर्ण स्तर से नीचे गिरना, जो शुक्रवार, 6 फरवरी 2026 को 60,008.52 डॉलर के 16 महीने के निचले स्तर पर पहुंचा, यह सिर्फ क्रिप्टोकरेंसी में आई गिरावट नहीं है। यह ग्लोबल लिक्विडिटी (Liquidity) की तंगी का सीधा संकेत है, जिसने टेक्नोलॉजी स्टॉक्स (Technology Stocks) और कीमती धातुओं (Precious Metals) पर भी दबाव बनाया है। गुरुवार को S&P 500 इंडेक्स 1.2% गिरा और साल के लिए निगेटिव टेरेटरी में आ गया, जबकि Nasdaq Composite 1.6% फिसल गया। इस बिकवाली की वजह लेबर मार्केट डेटा और AI वैल्यूएशन्स को लेकर चिंताएं थीं। गोल्ड (Gold) और सिल्वर (Silver) की कीमतों में भी अस्थिरता देखी गई, जिसने इन्वेस्टर्स को अपने पोर्टफोलियो से रिस्क कम करने पर मजबूर किया और डिजिटल एसेट्स (Digital Assets) में गिरावट को और बढ़ाया।

पूरी क्रिप्टो मार्केट पर दबाव, भारी बिकवाली

यह एक व्यापक डी-डिविज़निंग (De-leveraging) घटना का संकेत देता है, जहाँ कैपिटल (Capital) रिस्क वाली एसेट्स (Assets) से निकल रहा है, न कि सिर्फ क्रिप्टो सेक्टर की किसी खास खबर पर प्रतिक्रिया कर रहा है। टोटल क्रिप्टो मार्केट कैप (Market Cap) अपने पीक (Peak) से लगभग 2 ट्रिलियन डॉलर तक गिर चुका है, जिसमें पिछले महीने 1 ट्रिलियन डॉलर से ज्यादा का नुकसान हुआ है। यह किसी एक एसेट की समस्या नहीं, बल्कि एक सिस्टमिक (Systemic) लिक्विडिटी खिंचाव को दर्शाता है।

ETF से भारी आउटफ्लो और लिक्विडेशन

Bitcoin की गिरावट का एक बड़ा कारण स्पॉट Bitcoin ETF (Exchange Traded Funds) से लगातार हो रहा आउटफ्लो (Outflow) है। विश्लेषकों का कहना है कि जनवरी में 3 अरब डॉलर से ज्यादा का आउटफ्लो हुआ, जो दिसंबर और नवंबर में हुए अरबों डॉलर के आउटफ्लो के बाद आया है। इससे Bitcoin की डिमांड और कीमत पर सीधा असर पड़ा है। इसी के साथ, 24 घंटे के भीतर 1 अरब डॉलर से ज्यादा की Bitcoin पोजीशंस लिक्विडेट (Liquidate) हुईं, जिसने ट्रेडर्स को अपनी पोजीशन से निकलने पर मजबूर किया और कीमतों को और नीचे धकेल दिया। इस भारी लिक्विडेशन (Liquidation) और ETF की घटती डिमांड के कारण, विश्लेषकों का मानना है कि 56K तक की गिरावट संभव है, खासकर अगर रिस्क-ऑफ (Risk-off) सेंटीमेंट बढ़ता है। क्रिप्टो मार्केट का फियर एंड ग्रीड इंडेक्स (Fear and Greed Index) भी 5 के ऑल-टाइम लो (All-time low) पर आ गया है, जो बाजार में अत्यधिक भय को दर्शाता है।

टेक सेक्टर से जुड़ाव और अन्य क्रिप्टो पर असर

Bitcoin की कीमतें ऐतिहासिक रूप से टेक्नोलॉजी सेक्टर से जुड़ी रही हैं, खासकर AI-ड्रिवन रैलियों (Rallies) के दौरान। इसलिए, टेक शेयरों पर दबाव, जैसे कि Qualcomm के 8.5% गिरने का असर Bitcoin पर भी पड़ा है। बाजार ग्लोबल इकोनॉमिक डेटा के प्रति संवेदनशील हो गया है, जैसे कि अमेरिका में बेरोजगारी लाभ आवेदनों में वृद्धि, जिसने रिस्क एवर्जन (Risk aversion) को बढ़ाया है। Ethereum (ETH) जैसी प्रमुख क्रिप्टोकरेंसी में भी तेज गिरावट आई है, ETH लगभग 1,880 डॉलर पर ट्रेड कर रहा है और एक बड़ी साप्ताहिक गिरावट की ओर बढ़ रहा है।

एक्सपर्ट्स की राय और आगे की राह

Deutsche Bank के विश्लेषकों ने ETF के आउटफ्लो को Bitcoin की कीमत पर मुख्य बाधा बताया है। CoinSwitch Markets Desk ने इसे "व्यापक लिक्विडिटी खिंचाव" बताया है। हालांकि 58,000 से 60,000 डॉलर का बैंड एक महत्वपूर्ण सपोर्ट जोन बना हुआ है, लेकिन बाजार का सेंटीमेंट नाजुक है। Pi42 के CEO अविनाश शेखर ने बताया कि Bitcoin अपने हालिया पीक से लगभग आधा गिर चुका है, जो लिक्विडेशन और ETF आउटफ्लो के प्रभाव को दर्शाता है। 70,000–72,000 डॉलर की रेंज से ऊपर लगातार रिबाउंड (Rebound) करने में विफलता ने एक डिफेंसिव मार्केट टोन (Defensive Market Tone) को मजबूत किया है। आगे चलकर, शेयर बाजार (Share Bazaar) में कमजोरी, और ETF आउटफ्लो जारी रहने से कीमतें और गिर सकती हैं। हालांकि, 58,000–60,000 डॉलर की रेंज को महत्वपूर्ण सपोर्ट माना जा रहा है, और अगर अस्थिरता कम होती है तो बाइंग इंटरेस्ट (Buying Interest) बढ़ सकती है। बाजार की यह स्थिति मैक्रो पॉलिसी शिफ्ट्स (Macro Policy Shifts) से भी जुड़ी है; उदाहरण के लिए, फेडरल रिजर्व (Federal Reserve) का ब्याज दरों पर सतर्क रुख अनिश्चितता को बढ़ा रहा है।

Disclaimer:This content is for educational and informational purposes only and does not constitute investment, financial, or trading advice, nor a recommendation to buy or sell any securities. Readers should consult a SEBI-registered advisor before making investment decisions, as markets involve risk and past performance does not guarantee future results. The publisher and authors accept no liability for any losses. Some content may be AI-generated and may contain errors; accuracy and completeness are not guaranteed. Views expressed do not reflect the publication’s editorial stance.