'शैडो बैंक' कैसे बन रहे हैं क्रिप्टो एक्सचेंज?
BIS की रिपोर्ट बताती है कि बड़े क्रिप्टो एक्सचेंज अब पारंपरिक वित्तीय संस्थानों की तरह काम करने लगे हैं। ये प्लेटफॉर्म्स एक ही छत के नीचे ट्रेडिंग, लेंडिंग (कर्ज देना) और हाई-यील्ड (ज्यादा मुनाफा देने वाले) प्रोडक्ट्स जैसी कई वित्तीय सेवाएं दे रहे हैं। इन 'मल्टी-फंक्शन क्रिप्टो-एसेट इंटरमीडियरीज' (MCIs) को बैंक जैसी सेवाएं देते देखना चिंताजनक है, क्योंकि ये पारंपरिक वित्तीय फर्मों की तुलना में बहुत कम रेगुलेटरी देखरेख और निवेशक सुरक्षा के साथ काम कर रहे हैं।
पारंपरिक फाइनेंस से तुलना और बढ़ रहा जोखिम
रिपोर्ट में बताया गया है कि क्रिप्टो एक्सचेंज सिर्फ बेसिक ट्रेडिंग से आगे बढ़कर फुल-फ्लेज्ड वित्तीय मध्यस्थ (financial intermediaries) बन गए हैं। टोकन जारी करने, ट्रेडिंग, लिवरेज (leverage) और कस्टडी (custody) जैसी सेवाओं को एक साथ जोड़ने से डिजिटल एसेट सिस्टम में विफलता के एकल बिंदु (single points of failure) बन रहे हैं। इसके विपरीत, पारंपरिक फाइनेंस में जोखिम प्रबंधन के लिए अक्सर इन फंक्शन्स को अलग-अलग रखा जाता है। लेकिन MCIs अक्सर इंटीग्रेटेड स्ट्रक्चर (integrated structure) और अपारदर्शिता (opacity) के साथ काम करते हैं।
'यील्ड' प्रोडक्ट्स का मायाजाल और रिटेल निवेशक
'यील्ड' प्रोडक्ट्स को पैसिव इनकम (passive income) के तौर पर आकर्षक तरीके से बेचा जाता है। BIS के अनुसार, ये असल में एक्सचेंज को दिए गए असुरक्षित कर्ज (unsecured loans) होते हैं। इसका सीधा मतलब है कि यूजर्स सीधे प्लेटफॉर्म की सॉल्वेंसी (solvency) के जोखिम का सामना करते हैं, जो पारंपरिक बैंकिंग में इंश्योर्ड डिपॉजिट (insured deposits) से बिल्कुल अलग है। यह मॉडल अनरेगुलेटेड बैंकिंग की तरह है, जहां डिपॉजिट का उपयोग सट्टा गतिविधियों (speculative activities) के लिए होता है, बिना पर्याप्त कैपिटल (capital) या लिक्विडिटी (liquidity) के।
Celsius और FTX की विफलताएं बनीं मिसाल
पारदर्शिता की कमी और डिपॉजिट इंश्योरेंस (deposit insurance) न होने के कारण रिटेल निवेशक अत्यधिक असुरक्षित हो जाते हैं। Celsius और FTX जैसे बड़े एक्सचेंजों के पतन ने इस बात को उजागर किया है कि कैसे अत्यधिक लिवरेज, अपारदर्शिता और पर्याप्त सुरक्षा उपायों के बिना वादे, सिस्टमैटिक जोखिम (systemic risks) पैदा कर सकते हैं।
एक साथ फंक्शन्स से बढ़ता है सिस्टमैटिक खतरा
जब MCIs कई फंक्शन्स को एक साथ करते हैं, तो हितों का टकराव (conflicts of interest) पैदा होता है और सिस्टमैटिक जोखिम कई गुना बढ़ जाते हैं। एक प्रमुख MCI की विफलता से मार्केट पार्टिसिपेंट्स में कैस्केडिंग लिक्विडेशन (cascading liquidations) हो सकता है। रिपोर्ट में $19 बिलियन के एक ऐसे ही लिक्विडेशन इवेंट का जिक्र है जो अक्टूबर 2025 में हुआ था। इन बिजनेस मॉडलों में हाई लिवरेज और अपारदर्शिता के कारण ये तेज गिरावट के प्रति संवेदनशील होते हैं।
कॉन्ट्रैक्ट्स की जटिलता और रेगुलेटरी चुनौतियां
क्रिप्टो सेवा प्रदाताओं के साथ कस्टमर कॉन्ट्रैक्ट्स (customer contracts) अक्सर जटिल, बदलने योग्य और अस्पष्ट होते हैं, जिससे कंपनी के इनसॉल्वेंट (insolvent) होने की स्थिति में एसेट ओनरशिप (asset ownership) और अधिकारों को लेकर भारी अनिश्चितता बनी रहती है। क्रिप्टो एसेट रेगुलेशन (crypto asset regulation) अभी भी बिखरा हुआ है, और रेगुलेटर्स इन मध्यस्थों के लिए व्यापक नियम बनाने में संघर्ष कर रहे हैं।
भविष्य की राह: सख्त रेगुलेशन की मांग
BIS की रिपोर्ट और पिछली बाजार की उथल-पुथल, क्रिप्टो बाजारों के लिए व्यापक और सुसंगत वैश्विक रेगुलेशन की तत्काल आवश्यकता को दर्शाती है। रेगुलेटर्स दुनिया भर में यह मूल्यांकन कर रहे हैं कि कैसे मौजूदा वित्तीय नियमों को अनुकूलित किया जाए या नए नियम बनाए जाएं ताकि इन MCIs की कमजोरियों को दूर किया जा सके।
