ग्लोबल मार्केट से मिल रहे कमजोर संकेतों और संस्थागत निवेशकों (institutional investors) की घटती रुचि के बीच क्रिप्टोकरेंसी बाजार में बड़ी उथल-पुथल देखने को मिल रही है। इस बीच, AI (Artificial Intelligence) से प्रेरित एक मेमे कॉइन Pippin (PIPPIN) ने सबको चौंका दिया है, क्योंकि यह बाज़ार की गिरावट के बावजूद 135% से ज़्यादा चढ़ गया है।
Solana ब्लॉकचेन पर मौजूद Pippin (PIPPIN) नाम का यह AI-जेनरेटेड मेमे कॉइन, पिछले चार हफ्तों में करीब 135% का उछाल दर्ज कर चुका है। अकेले पिछले 24 घंटों में ही इसने 10% की बढ़त हासिल की है। मार्केट इंटेलिजेंस प्लेटफॉर्म्स के मुताबिक, यह तेज़ी स्पेकुलेटिव इंटरेस्ट (speculative interest) और तेज़ी से बढ़ते मार्केट कैप की वजह से है, जो अब $730 मिलियन के पार चला गया है। दिलचस्प बात यह है कि Pippin की शुरुआत ChatGPT से जनरेट हुई एक तस्वीर से हुई थी और अब यह सोशल मीडिया पर एक ऑटोमेटेड AI एजेंट की तरह काम करता है, जिसने निवेशकों का ध्यान खींचा है।
दूसरी तरफ, Bitcoin (BTC) पर दबाव बना हुआ है। शुरुआती ट्रेडिंग में यह $63,000 के स्तर से नीचे गिर गया था, लेकिन बाद में $63,200 के आसपास थोड़ा संभल पाया। पिछले 24 घंटों में इसमें लगभग 4% की गिरावट आई है, और यह अपने अक्टूबर के हाई (high) से 50% तक नीचे आ चुका है। Ethereum (ETH) लगभग $1,938, Solana (SOL) करीब $83, और XRP $1.39 पर कारोबार कर रहे हैं, जो इसी तरह की या इससे भी ज़्यादा गिरावट दिखा रहे हैं। पूरे क्रिप्टो मार्केट का कुल मार्केट कैप भी गिरता हुआ दिख रहा है, जो बाज़ार में 'रिस्क-ऑफ' (risk-off) सेंटिमेंट को दर्शाता है।
Pippin की इस तूफानी तेजी के बीच, अन्य AI-फोकस्ड क्रिप्टोकरेंसीज़ जैसे Bittensor (TAO) जो $177 पर, NEAR Protocol (NEAR) $1.04 पर, और Internet Computer (ICP) $2.38 पर कारोबार कर रहे हैं, वे भी अच्छी ग्रोथ दिखा रहे हैं। जैसे-जैसे AI का इस्तेमाल ब्लॉकचेन में बढ़ रहा है, ये टोकन डिमांड में आ रहे हैं। हालांकि, Pippin की अचानक और भारी उछाल, जिसकी वजह ज़्यादातर हाइप (hype) है, उसे दूसरे यूटिलिटी-फोक्स्ड AI प्रोजेक्ट्स से अलग करती है।
बाजार के विश्लेषक (analysts) मौजूदा स्थिति की तुलना अतीत के स्पेकुलेटिव बबल्स (speculative bubbles) से कर रहे हैं, जैसे 17वीं सदी का ट्यूलिप मैनिया (Tulip Mania) या 2000 के दशक की डॉट-कॉम क्रैश (Dot-com crash)। इन दौरों में 'FOMO' (Fear of Missing Out) यानी कुछ छूट जाने का डर और झुंड की मानसिकता हावी रहती है, जहां कीमतें असल वैल्यू (intrinsic value) से बहुत दूर निकल जाती हैं। क्रिप्टो बाजार ने भी 2017 के ICO बबल और 2022 के क्रैश जैसे कई उतार-चढ़ाव देखे हैं। मौजूदा समय में हाई लीवरेज (high leverage) और स्पेकुलेटिव फर्वोर (speculative fervor) पिछली कुछ अतिरंजनाओं (excesses) की याद दिलाते हैं, जो बताते हैं कि तेज़ उछाल के बाद भारी गिरावट भी आ सकती है।
Bitcoin पर यह बिकवाली का दबाव मैक्रोइकॉनोमिक (macroeconomic) चिंताओं से और बढ़ रहा है। अमेरिका से आ रहे टैरिफ (tariff) संबंधी घोषणाओं ने निवेशकों के रिस्क लेने की क्षमता को कम कर दिया है। इसका असर Coinbase Premium Index पर भी दिख रहा है, जो लगातार 39-40 दिनों से नेगेटिव है। इसका मतलब है कि अमेरिकी बाजार में बिकवाली का दबाव ज़्यादा है और संस्थागत निवेशक (institutional investors) जोखिम उठाने से कतरा रहे हैं। Bitcoin और सोने (gold) के बीच का कोरिलेशन (correlation) भी नेगेटिव हो गया है, जो दिखाता है कि निवेशक क्रिप्टो से सुरक्षित माने जाने वाले गोल्ड की ओर रुख कर रहे हैं। S&P 500 में मार्केट कंसंट्रेशन (market concentration) का कम होना भी अन्य रिस्की एसेट्स (risk assets) को प्रभावित कर सकता है।
विश्लेषक (Analysts) Bitcoin के $60,000 के सपोर्ट लेवल पर कड़ी नज़र रखे हुए हैं। अगर यह स्तर टूटता है, तो बड़े पैमाने पर लिक्विडेशन (liquidations) ट्रिगर हो सकते हैं और कीमत $50,000 के निचले स्तर तक गिर सकती है, जैसा कि 2022 में हुआ था। माइनर्स (miners) से बढ़ रही सप्लाई और संस्थागत निवेशकों की घटती मांग, ETF से लगातार हो रहे आउटफ्लो (outflows) के साथ मिलकर इस स्थिति को और गंभीर बना रही है। 'क्रिप्टो विंटर' (crypto winter) और बाज़ार में चल रही डी-डीवरेजिंग (deleveraging) इस नाजुक स्थिति में और योगदान दे रही है।
आगे चलकर, बाज़ार में कंसॉलिडेशन (consolidation) और 'वेट-एंड-सी' (wait-and-see) मोड देखने को मिल सकता है। कुछ विश्लेषक Bitcoin के लिए $150,000 तक के लक्ष्य की भविष्यवाणी कर रहे हैं, लेकिन ज़्यादातर एक्सपर्ट्स अभी और वोलैटिलिटी (volatility) की उम्मीद कर रहे हैं। Bitcoin को फिर से ऊपर जाने के लिए $68,000 के स्तर को पार करना और वहां टिके रहना ज़रूरी होगा, लेकिन नज़दीकी भविष्य में अपने पुराने ऑल-टाइम हाई (all-time high) पर लौटना मुश्किल दिख रहा है। बाज़ार की दिशा मैक्रोइकॉनोमिक कारकों के स्थिर होने और संस्थागत मांग के वापस आने पर निर्भर करेगी। इन सबके बिना, गिरावट का खतरा बना रहेगा, खासकर अगर Bitcoin $60,000 जैसे अहम सपोर्ट लेवल को बनाए रखने में नाकाम रहता है।