बेंगलुरु स्थित iD Fresh Food ने FY26 में **₹879.3 करोड़** का रेवेन्यू हासिल किया है, जो सालाना आधार पर **28%** अधिक है। हालांकि, बड़े 'एक्सेप्शनल आइटम्स' के कारण कंपनी को **₹600 करोड़** से ज्यादा का नेट लॉस हुआ है।
कोर बिजनेस की मजबूती
अगर कंपनी के बिजनेस के बुनियादी ढांचे को देखें, तो तस्वीर काफी सकारात्मक है। कंपनी के वन-टाइम खर्चों को अगर हटा दिया जाए, तो प्रॉफिट बिफोर टैक्स में जबरदस्त सुधार हुआ है। पिछले फाइनेंशियल ईयर में जो प्रॉफिट ₹23.6 करोड़ था, वह इस साल बढ़कर ₹78 करोड़ के आसपास पहुंच गया है। यह साफ दिखाता है कि इडली और डोसा बैटर जैसे उत्पादों की मांग बाजार में बनी हुई है और इनका कोर बिजनेस कैश-फ्लो के मामले में काफी बेहतर प्रदर्शन कर रहा है।
बड़े खर्च और विस्तार की रणनीति
कंपनी ने अपनी पहुंच बढ़ाने के लिए खर्चों में भी इजाफा किया है। इस साल कुल खर्चे करीब ₹800 करोड़ तक पहुंच गए हैं। पनीर, दही और स्नैकिंग प्रोडक्ट्स जैसे नए सेगमेंट में एंट्री और विस्तार के कारण कच्चे माल की लागत ₹260 करोड़ (13% वृद्धि) और स्टॉक-इन-ट्रेड की खरीदारी ₹131 करोड़ (27.6% वृद्धि) तक पहुंच गई है।
ग्लोबल मार्केट पर नजर
iD Fresh Food अब अपने ऑपरेशंस को इंटरनेशनल लेवल पर ले जाने की तैयारी में है। कंपनी सिंगापुर, श्रीलंका, अमेरिका, यूके, यूरोप और कनाडा में मैन्युफैक्चरिंग हब स्थापित करने की योजना बना रही है। कंपनी का लक्ष्य बल्क प्रोडक्शन को सेंट्रलाइज करना है ताकि लागत पर बेहतर कंट्रोल रखा जा सके।
निवेश और भविष्य की राह
फिलहाल यह एक प्राइवेट कंपनी है, जिसे Premji Invest, Apax Partners और NewQuest Capital Partners जैसे बड़े निवेशकों का समर्थन हासिल है। हालांकि मार्केट में कंपनी के आईपीओ (IPO) को लेकर चर्चाएं जरूर हैं, लेकिन अभी तक कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है। आने वाले समय में निवेशकों के लिए यह देखना अहम होगा कि कंपनी अपने इंटरनेशनल एक्सपेंशन के दौरान लागत को कैसे मैनेज करती है और क्या वे बिना किसी बड़े एक्सेप्शनल लॉस के अपनी ग्रोथ बरकरार रख पाते हैं।
