Zydus Wellness: रेवेन्यू में तूफानी उछाल, पर कंपनी घाटे में, निवेशकों के लिए झटका

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AuthorAditya Rao|Published at:
Zydus Wellness: रेवेन्यू में तूफानी उछाल, पर कंपनी घाटे में, निवेशकों के लिए झटका
Overview

Zydus Wellness के लिए यह तिमाही मिली-जुली रही। कंपनी का कंसॉलिडेटेड रेवेन्यू (Consolidated Revenue) एक्विजिशन (Acquisitions) के दम पर **108.5%** बढ़कर **₹9,633 मिलियन** हो गया, लेकिन दूसरी ओर, कंपनी ने **₹399 मिलियन** का कंसॉलिडेटेड नेट लॉस (Consolidated Net Loss) दर्ज किया है।

रेवेन्यू में रिकॉर्ड उछाल, फिर भी घाटा

Zydus Wellness के लेटेस्ट तिमाही नतीजों ने बाज़ार को चौंका दिया है। कंपनी ने हाल ही में Naturell (India) Private Limited (NIPL) और Comfort Click Limited (CCL) जैसे अहम एक्विजिशन (Acquisitions) पूरे किए हैं, जिसके चलते उसका कंसॉलिडेटेड रेवेन्यू (Consolidated Revenue) पिछले साल की इसी तिमाही के मुकाबले 108.5% उछलकर ₹9,633 मिलियन पर पहुंच गया। NIPL का अधिग्रहण ₹3,900 मिलियन में और CCL का अधिग्रहण ₹3,060 मिलियन में पूरा हुआ था।

घाटे की वजह क्या?

टॉप-लाइन (Top-line) में इस शानदार बढ़ोतरी के बावजूद, कंपनी ₹399 मिलियन के कंसॉलिडेटेड नेट लॉस (Consolidated Net Loss) में चली गई। पिछले साल यानी Q3 FY25 में कंपनी ने ₹64 मिलियन का नेट प्रॉफिट (Net Profit) कमाया था। इस भारी नुकसान की मुख्य वजहें एक्विजिशन से जुड़े भारी-भरकम खर्च और ₹66 मिलियन के एक्सेप्शनल आइटम्स (Exceptional Items) रहे, जो कि नए लेबर कोड्स लागू करने से जुड़े थे।

स्टैंडअलोन परफॉर्मेंस में मामूली बढ़त

अगर सिर्फ स्टैंडअलोन (Standalone) नतीजों पर नज़र डालें, तो तस्वीर कुछ बेहतर दिखती है। स्टैंडअलोन रेवेन्यू (Standalone Revenue) 59.6% बढ़कर ₹1,416 मिलियन हो गया, जबकि नेट प्रॉफिट (Net Profit) में 2.5% की मामूली बढ़ोतरी के साथ यह ₹121 मिलियन पर पहुंच गया।

नौ महीने के नतीजे भी चिंताजनक

पिछले नौ महीनों (Nine Months) के कंसॉलिडेटेड नतीजों को देखें तो रेवेन्यू 38.4% बढ़कर ₹24,639 मिलियन दर्ज किया गया, लेकिन कंसॉलिडेटेड नेट प्रॉफिट में 79.9% की भारी गिरावट आई और यह ₹352 मिलियन पर आ गया। इसी तरह, नौ महीनों में स्टैंडअलोन रेवेन्यू 112.4% बढ़कर ₹4,170 मिलियन हुआ, लेकिन नेट प्रॉफिट 6.5% घटकर ₹243 मिलियन रह गया।

मैनेजमेंट की तरफ से कोई गाइडेंस नहीं

कंपनी के मैनेजमेंट ने इस बार नतीजों के साथ आगे के लिए कोई भविष्य की गाइडेंस (Future Guidance) नहीं दी है। ऐसे में, निवेशकों के मन में यह सवाल है कि क्या कंपनी इन अधिग्रहणों को सफलतापूर्वक इंटीग्रेट (Integrate) कर पाएगी और कंसॉलिडेटेड लेवल पर मुनाफे की स्थिति में कब लौटेगी। कंपनी ने लिक्विडिटी (Liquidity) बढ़ाने के लिए इक्विटी शेयर स्प्लिट (Equity Share Split) का भी फैसला किया है।

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