वडोदरा स्थित Zydex अब अपने बिजनेस मॉडल में बड़ा बदलाव कर रही है। कंपनी B2B प्रोजेक्ट्स से हटकर रिटेल पेंट मार्केट में उतर रही है, जिसके लिए उसने जर्मन सिलिकेट टेक्नोलॉजी का सहारा लिया है। कंपनी ने अगले **2** साल में अपने रेवेन्यू को **₹300 करोड़** तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा है, जिसके लिए **₹50 करोड़** का निवेश किया जा रहा है।
बाजार बदलने की रणनीति
Zydex Group अब तक अपनी स्पेशलिटी केमिकल्स और वाटरप्रूफिंग कॉन्ट्रैक्ट्स के लिए जानी जाती थी, जिसमें M3M India जैसे बड़े डेवलपर्स शामिल थे। अब कंपनी का पूरा ध्यान आम उपभोक्ताओं की ओर है।
सिलिकेट तकनीक का जादू
कंपनी ने जर्मनी की कंपनी KEIMFARBEN के साथ पार्टनरशिप की है। बाजार में बिकने वाले आम एक्रिलिक पेंट्स दीवार पर प्लास्टिक की परत बना देते हैं, जबकि Zydex के सिलिकेट पेंट्स दीवार के साथ रासायनिक रूप से जुड़ जाते हैं। इससे दीवार 'सांस' ले पाती है, जिससे मानसून में होने वाली पपड़ी (peeling) और फफूंद (fungal growth) जैसी समस्याएं खत्म हो जाती हैं।
बड़े लक्ष्य और चुनौतियां
कंपनी ने अपने वडोदरा प्लांट में ₹50 करोड़ का निवेश किया है। कंपनी का लक्ष्य अपने पेंट और वाटरप्रूफिंग सेगमेंट के रेवेन्यू को पिछले फाइनेंशियल ईयर के ₹90 करोड़ से बढ़ाकर ₹300 करोड़ तक ले जाना है। हालांकि, B2B से B2C (रिटेल) में शिफ्ट होना आसान नहीं होगा। इसके लिए कंपनी को बड़े पैमाने पर डीलर्स और डिस्ट्रीब्यूटर्स का नेटवर्क खड़ा करना होगा और मार्केट में पहले से जमे बड़े दिग्गजों को कड़ी टक्कर देनी होगी।
अब देखने वाली बात यह होगी कि क्या भारतीय ग्राहक अपने पुराने पेंट्स छोड़कर इस नई मिनरल-बेस्ड तकनीक को अपनाते हैं या नहीं।
