Zomato अब अपनी प्रमोशन की रणनीति को बेहतर बना रहा है। कंपनी अब नए ग्राहक बनाने की बजाय मौजूदा ग्राहकों की रुचि को भुनाने पर ध्यान केंद्रित करेगी। कंपनी Eternal Ltd. ने Q1 FY27 में ₹20,211 करोड़ का मजबूत रेवेन्यू दर्ज किया है, लेकिन निवेशक मार्केटिंग पर होने वाले भारी खर्च और रेस्टोरेंट एसोसिएशन के साथ कमीशन को लेकर चल रही बातचीत पर भी नजर रख रहे हैं।
Zomato का 'प्रिसिजन मार्केटिंग' पर फोकस
फूड डिलीवरी के कॉम्पिटिटिव मार्केट में Zomato अपनी मार्केटिंग स्ट्रैटेजी में बड़ा बदलाव कर रहा है। कंपनी अब आक्रामक और बड़े पैमाने पर डिस्काउंट देने की बजाय 'प्रिसिजन मार्केटिंग' मॉडल अपनाएगी। इसका मतलब है कि अब वे हैवी प्रमोशनल खर्च करके नए ग्राहक बनाने की कोशिश नहीं करेंगे, बल्कि उन ग्राहकों को टारगेट करेंगे जो पहले से ही ऑर्डर करने का मन बना चुके हैं। इस स्ट्रेटेजिक बदलाव का मकसद ग्रोथ और सस्टेनेबल प्रॉफिटेबिलिटी के बीच संतुलन बनाना है।
फाइनेंशियल डिटेल्स और मार्केटिंग खर्च
यह नई मार्केटिंग स्ट्रैटेजी ऐसे समय में आ रही है जब कंपनी का खर्च काफी ज्यादा है। Zomato की पेरेंट कंपनी Eternal Ltd. ने फाइनेंशियल ईयर 2027 (Q1 FY27) की पहली तिमाही में ₹20,211 करोड़ का कंसोलिडेटेड रेवेन्यू रिपोर्ट किया है। इस रेवेन्यू ग्रोथ में क्विक कॉमर्स सेगमेंट, Blinkit का बड़ा योगदान रहा है।
हालांकि, इन नतीजों में ग्रोथ से जुड़े खर्चे भी साफ दिखते हैं। Q1 FY27 में अकेले मार्केटिंग पर ₹945 करोड़ खर्च हुए। कंपनी का लक्ष्य है कि यह खर्च परफॉरमेंस-लेड हो, जिसमें कस्टमर रिटेंशन और पेबैक पीरियड जैसे मेट्रिक्स पर ध्यान दिया जाए। लेकिन, कंपनी के बॉटम लाइन के लिए यह हाई इन्वेस्टमेंट एक अहम फैक्टर बना हुआ है। Eternal Ltd. ने इस तिमाही में ₹92 करोड़ का नेट प्रॉफिट दर्ज किया, जो पिछले क्वार्टर की तुलना में 47.1% कम था। इस गिरावट की वजह टैक्स और क्विक कॉमर्स वर्टिकल सहित बिजनेस एक्सपेंशन में चल रहे इन्वेस्टमेंट थे।
ऑपरेशनल और सेक्टर से जुड़े रिस्क
मार्केटिंग खर्च के अलावा, कंपनी रेस्टोरेंट एसोसिएशन से भी दबाव झेल रही है। कमीशन स्ट्रक्चर और डिस्काउंट पॉलिसी को लेकर असहमति से इस इकोसिस्टम में टेंशन बढ़ गई है। रेस्टोरेंट बॉडीज द्वारा प्लान किया गया बॉयकॉट फिलहाल 1 सितंबर, 2026 तक टाल दिया गया है, लेकिन यह सिचुएशन एक बड़ा ऑपरेशनल रिस्क बनी हुई है। इन वार्ताओं का नतीजा कंपनी के रेस्टोरेंट पार्टनर्स के साथ उसके रिलेशन और ऑपरेटिंग मार्जिन पर बड़ा असर डाल सकता है।
इसके अलावा, क्विक कॉमर्स और फूड डिलीवरी सेक्टर में कड़ा कॉम्पिटिशन जारी है। अपनी मार्केट शेयर बनाए रखने के लिए कंपनी को इंफ्रास्ट्रक्चर और एडवरटाइजिंग पर खर्च करना होगा। निवेशक इन मजबूत रेवेन्यू के साथ-साथ नेट प्रॉफिट में आने वाली अस्थिरता और दोनों बिजनेस (फूड और क्विक कॉमर्स) में ग्रोथ को सपोर्ट करने के लिए लगातार लगने वाले हाई कैपिटल और मार्केटिंग आउटले पर भी ध्यान दे रहे हैं।
आगे चलकर, निवेशकों के लिए ये चीजें ट्रैक करना जरूरी होगा: रेस्टोरेंट एसोसिएशन के साथ वार्ताओं का सफल समाधान, हाई मार्केटिंग लागत के बावजूद कंपनी का प्रॉफिट मार्जिन बनाए रखने या सुधारने की क्षमता, और क्विक कॉमर्स बिजनेस से रेवेन्यू का लगातार योगदान।
