Zomato की सहायक कंपनी Blinkit ने दिल्ली-NCR में Apple का नया iPhone Duo लॉन्च किया और मात्र **5 मिनट** के भीतर पूरा स्टॉक बिक गया। कंपनी अब ग्रॉसरी से हटकर हाई-वैल्यू इलेक्ट्रॉनिक्स की ओर तेजी से कदम बढ़ा रही है।
प्रीमियम इलेक्ट्रॉनिक्स में Blinkit की धाक
Zomato के स्वामित्व वाली क्विक-कॉमर्स प्लेटफॉर्म Blinkit ने दिल्ली-NCR में Apple के नए 'iPhone Duo' को लिस्ट किया था। लोगों में इसका क्रेज इतना था कि देखते ही देखते 5 मिनट में सारा इन्वेंट्री स्टॉक खत्म हो गया। यह सफलता बताती है कि क्विक-कॉमर्स कंपनियां अब केवल डेली ग्रॉसरी तक सीमित नहीं रहना चाहतीं, बल्कि अब उनकी नजर महंगे गैजेट्स और प्रीमियम सामान पर है।
क्यों बढ़ाई जा रही है कैटेगरी?
इस कदम के पीछे मुख्य मकसद 'एवरेज ऑर्डर वैल्यू' (AOV) को बढ़ाना है। ग्रॉसरी में मार्जिन कम होता है और ऑर्डर साइज भी छोटा होता है, लेकिन स्मार्टफोन जैसे महंगे गैजेट्स बेचने से कंपनी का ट्रांजैक्शन साइज सीधे तौर पर बढ़ जाता है। कंपनी का लक्ष्य अपने ऐप को अर्बन कस्टमर्स के लिए एक 'ऑल-इन-वन' प्लेटफॉर्म बनाने का है।
चुनौतियां और रिस्क
हालांकि, महंगे इलेक्ट्रॉनिक्स का बिजनेस ग्रॉसरी से काफी अलग है। इसमें:
- इन्वेंट्री का बड़ा निवेश: महंगे गैजेट्स के लिए पहले से बड़ा स्टॉक मेंटेन करना पड़ता है।
- लॉजिस्टिक्स का खर्च: चोरी, नुकसान या डैमेज का खतरा ग्रॉसरी के मुकाबले बहुत ज्यादा होता है।
- कम मार्जिन: इलेक्ट्रॉनिक्स पर मार्जिन काफी कम होता है, इसलिए डिलीवरी की लागत इसे और भी पतला बना सकती है।
कॉम्पिटिशन का दबाव
क्विक-कॉमर्स सेक्टर में Swiggy Instamart और Zepto जैसे बड़े खिलाड़ी पहले से मौजूद हैं। Blinkit का सीधा Apple के साथ पार्टनरशिप करना एक मास्टरस्ट्रोक हो सकता है, लेकिन निवेशकों को ध्यान देना होगा कि कंपनी इन महंगी वस्तुओं के मैनेजमेंट, स्टोरेज और सुरक्षा पर आने वाले खर्च को कैसे कंट्रोल करती है। आने वाली तिमाही के नतीजों में यह साफ हो जाएगा कि क्या यह 'हाई-टिकट' मॉडल प्रॉफिटेबिलिटी पर भारी पड़ता है या उसे सपोर्ट करता है।
