Zomato ने अपने प्लेटफॉर्म पर सिंथेटिक या 'एनलॉग' डेयरी प्रोडक्ट्स पर 31 अगस्त, 2026 से पूरी तरह बैन लगा दिया है। फूड सेफ्टी मानकों को कड़ा करने के लिए उठाए गए इस कदम के तहत, नियमों का पालन न करने वाले रेस्टोरेंट्स को प्लेटफॉर्म से हटाया जा सकता है।
Zomato ने अब सीधे तौर पर सिंथेटिक या 'एनलॉग' डेयरी प्रोडक्ट्स के खिलाफ जीरो-टॉलरेंस नीति अपना ली है। 31 अगस्त, 2026 से लागू होने वाले इस नए आदेश के बाद, हर पार्टनर रेस्टोरेंट को यह सुनिश्चित करना होगा कि उनके सभी डिशेज में सिर्फ असली डेयरी का ही इस्तेमाल हो। कंपनी ने साफ किया है कि यदि कोई रेस्टोरेंट इन मानकों पर खरा नहीं उतरता है, तो उनके आइटम्स को तुरंत हटाया जा सकता है या फिर रेस्टोरेंट को नेटवर्क से बाहर का रास्ता दिखाया जा सकता है।
क्यों लिया गया यह कड़ा फैसला?
यह बदलाव तब आया है जब फूड सेफ्टी को लेकर दबाव बढ़ता जा रहा है। हाल के महीनों में FSSAI और महाराष्ट्र जैसे राज्यों के फूड रेगुलेटर्स ने एनलॉग पनीर और नकली डेयरी उत्पादों पर नकेल कसी है। इन सिंथेटिक विकल्पों में अक्सर दूध के ठोस पदार्थों की जगह वेजिटेबल फैट्स और स्टार्च का इस्तेमाल होता है, जो न केवल स्वास्थ्य के लिए चिंता का विषय है, बल्कि लेबलिंग के नियमों का भी उल्लंघन है।
रेस्टोरेंट्स और इन्वेस्टर्स के लिए चुनौतियां
रेस्टोरेंट्स के लिए अब अपने सप्लाई चेन और प्रोडक्ट सर्टिफिकेशन का ऑडिट करना अनिवार्य हो गया है। जो रेस्टोरेंट्स लागत कम करने के लिए सस्ते सिंथेटिक विकल्पों पर निर्भर थे, अब उन्हें बढ़ती इनपुट कॉस्ट का सामना करना पड़ेगा। इसका सीधा असर मेन्यू की कीमतों और मुनाफे के मार्जिन पर पड़ सकता है।
दूसरी ओर, कंपनी का यह कदम अपनी साख को बेहतर बनाने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है। अतीत में कंपनी की B2B सप्लाई आर्म Hyperpure के जरिए सिंथेटिक पनीर की बिक्री को लेकर काफी आलोचना हुई थी। अब सख्त स्टैंडर्ड्स लागू करके कंपनी ब्रांड वैल्यू और कंज्यूमर ट्रस्ट को मजबूत करने की कोशिश में है। आने वाले समय में बाजार इस बात पर नजर रखेगा कि रेस्टोरेंट पार्टनर्स इस बदलाव को कितनी तेजी से अपनाते हैं और क्या इससे प्लेटफॉर्म पर रेस्टोरेंट्स की संख्या पर कोई असर पड़ता है।
