Zomato ने अपने कैश-ऑन-डिलीवरी (COD) ऑर्डर्स पर अब एक नया 'डायनामिक फी' वसूलना शुरू कर दिया है। लॉजिस्टिक्स लागत को कम करने के लिए उठाया गया यह कदम कंपनी के लिए बेहद अहम है, क्योंकि हाल ही में फाइनेंशियल ईयर 2027 की पहली तिमाही में कंपनी का नेट प्रॉफिट **47%** से ज्यादा गिर गया है।
अब कैश ऑर्डर करना होगा महंगा
Zomato ने उन ग्राहकों के लिए 'पे ऑन डिलीवरी फी' (Pay on Delivery Fee) पेश की है जो भुगतान के लिए कैश का विकल्प चुनते हैं। यह शुल्क ₹5 से ₹20 के बीच हो सकता है, जो यूजर और ऑर्डर वैल्यू के हिसाब से बदलता रहेगा। इस कदम का मुख्य उद्देश्य ग्राहकों को डिजिटल पेमेंट की ओर प्रोत्साहित करना और कैश हैंडलिंग की लागत को कम करना है।
मार्जिन पर दबाव और फाइनेंशियल चुनौती
कंपनी की पैरेंट एंटिटी, Eternal Ltd., इस समय वित्तीय चुनौतियों से जूझ रही है। कंपनी का रेवेन्यू ₹20,211 करोड़ रहा है, लेकिन टैक्स लायबिलिटी ₹180 करोड़ तक पहुंचने और अन्य खर्चों के कारण नेट प्रॉफिट 47.1% गिरकर सिर्फ ₹92 करोड़ रह गया है। हालांकि, कंपनी का EBITDA ₹594 करोड़ रहा है और मार्जिन 2.9% पर है, जिसे सुरक्षित रखने के लिए कंपनी हर संभव कोशिश कर रही है।
कॉम्पिटिशन और निवेशकों के लिए रिस्क
यह फैसला Zomato को उसके मुख्य प्रतिद्वंद्वी Swiggy से अलग खड़ा करता है, जिसने फिलहाल ऐसा कोई चार्ज नहीं लगाया है। निवेशकों के लिए सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या यह फीस ग्राहकों को कमिटमेंट से दूर ले जाएगी? अगर ज्यादा फीस के चलते ऑर्डर वॉल्यूम घटता है, तो कंपनी की ग्रोथ पर इसका बुरा असर पड़ सकता है। आने वाली तिमाहियों में यह देखना होगा कि क्या यह स्ट्रेटेजी प्रॉफिटेबिलिटी बढ़ाती है या फिर मार्केट शेयर पर खतरा पैदा करती है।
